सरवर नहाएं बर- कांतिकार्तिक यादव/देवी विसर्जन जस गीत
मुखड़ा
सरवर नहाएं बर जावय यहो जावय हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
यहो जावय हो मईया सरवर नहाएं बर जावय हो मां
//1//
इक्कीस ब्रह्माण्ड म इक्कीस बहनिया -2
नेवता मा सबो सकलाये सकलाये हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
झूमरथे आघू पांछु छोटे बड़े देवता-2
हरियर निंबुआ चढ़हाये, चढ़हाये हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
//2//
मारत हावय बईगा हा कारी पीवरी चाउर -2
दसों अंगूरी विनती सुनाये,सुनाये हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
गंगा अऊ जमुना सरसती हा उमंगे -2
लहर लहर लहराए , लहराए हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
//3//
आगू पाछु रेगत हावे माता के गण हा -2
फहर फहर फहराए ,फहराए हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
चरण पखारय अजय मुड़मा चपाए-2
अपन करम सहराए,सहराए हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
//4//
पांच भगत मईया तोरे जस गाए -2
जय जय होवय तुम्हारे, तुम्हारे हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
बालक बरुआ हो मईया कछु नई जाने -2
केवल शरण तुम्हारे, तुम्हारे हो मईया
सरवर नहाएं बर जावय हो मां
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माता रानी के मनमोहक जस गीत
1. सुवा नाचे
4. झुमरी तलैया
5.नीम डारा
7. धरम के बात
8. लहराए जवारा
गीत के महत्व (Importance)
✔️ ये गीत शीतला/दुर्गा माता के स्नान परंपरा से जुड़ाय हे
✔️ इसमें 21 शक्ति, प्रकृति अउ भक्त के एकता दिखे
✔️ गांव के परंपरा म ये गीत जुड़वास, जसगीत, पूजा समय गाये जाथे
✔️ ये गीत सिखाथे:
भक्ति में शुद्धता
प्रकृति के सम्मान
माता के प्रति पूर्ण समर्पण
👉 ये सिर्फ गीत नई, एक पूरा आध्यात्मिक अनुष्ठान हे
“सरवर नहाएं बर जावय हो मईया” ये लाइन सिरिफ एक घटना नई, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण के प्रतीक हे।
इहाँ सरोवर (सरवर) मतलब बाहरी पानी नई, बल्कि मन के भीतर के पवित्रता घलो होथे।
जब माता “नहाय बर जाथे”, त असल म वो: 👉 दुनिया के नकारात्मकता, दुख अउ रोग ला धो के दूर करथे
🔹 छुपा आध्यात्मिक संदेश
✔️ इक्कीस बहनिया (21 शक्तियां)
→ ये मानव जीवन के 21 प्रकार के दोष/ऊर्जा के संतुलन के प्रतीक हे
✔️ नींबू चढ़ाना
→ नेगेटिव ऊर्जा काटे के संकेत
✔️ बैंगा (मेंढक) के आवाज
→ प्रकृति बता देथे कि बदलाव आने वाला हे
✔️ गंगा-जमुना-सरस्वती
→ शरीर, मन अउ बुद्धि के शुद्धिकरण
✔️ माता के गण
→ जीवन के वो अदृश्य सहायक जेन हमन देख नई पाथन
✔️ बालक बरुआ कुछ नई जाने
→ सच्चा भक्त वो हे, जेन अपन आप ला खाली मानथे
👉 पूरा अर्थ एक लाइन म:
ये गीत सिखाथे कि जब मन, प्रकृति अउ भक्ति एक साथ जुड़थे, तब जीवन के हर दुःख धो जाथे अउ माता खुद मार्ग दिखाथे।
गीत के महत्व (Importance)
✔️ ये गीत शीतला/दुर्गा माता के स्नान परंपरा से जुड़ाय हे
✔️ इसमें 21 शक्ति, प्रकृति अउ भक्त के एकता दिखे
✔️ गांव के परंपरा म ये गीत जुड़वास, जसगीत, पूजा समय गाये जाथे
✔️ ये गीत सिखाथे:
भक्ति में शुद्धता
प्रकृति के सम्मान
माता के प्रति पूर्ण समर्पण
👉 ये सिर्फ गीत नई, एक पूरा आध्यात्मिक अनुष्ठान हे
कथा छत्तीसगढ़ी
बहुत पुराना समय के बात हे। एक छोटे गांव म हर साल भयंकर बीमारी फैल जाथे। गांव वाले डरे रहंय।
एक दिन एक बुजुर्ग महिला सपना म देखिस कि
माता सरोवर म स्नान करे बर आही, लेकिन गांव वाले स्वागत नई कर पावत हें।
दूसरे दिन वो गांव वाले मन ला बुलाके कहिस: 👉 “अगर तुमन माता के सरवर स्नान के तैयारी करहू, त गांव बच जाही”
गांव वाले मिलके:
सरोवर साफ करिन
नींबू, फूल चढ़ाइन
जसगीत गाइन
जइसे ही वो गीत गूंजे: “सरवर नहाएं बर जावय हो मईया…”
अचानक:
हवा सुगंधित होगे
पानी चमक उठिस
मेंढक, पक्षी सब आवाज करे लगिन
रात म माता प्रकट होइस अउ कहिस: 👉 “जहां भक्ति सच्चा होथे, मैं खुद आथों”
उस दिन के बाद: ✔️ गांव म बीमारी खत्म होगे
✔️ हर साल ये गीत परंपरा बन गे
👉 आज भी मान्यता हे कि ये गीत गाये जाथे,
माता सच म सरोवर म स्नान करे आथें
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