भोला जोतय ओ नागर मा / गायक- दीपक साहू /पचरा cgjaslyrics
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गीत-भोला जोतय ओ नागर मा
गायक- दीपक साहू
Music company- भक्ति गीत सारंगढ़
वेबसाइट ऑनर -kk Panchare
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मुखड़ा
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
उड़ान - जब डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
उड़ान -डोंगरी के तीरे तीर हां
अंतरा -1
जब काहेन के तोर डारी लगे हे काहेन लागय जुड़ा
जब काहेन के तोर डारी लगे हे काहेन लागय जुड़ा
उड़ान -जब काहेन के तोर बइला बने हे
डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
अंतरा -2
जब अजगर के तोर डारी लगे हे जुड़ा महामंडल जुड़ा
जब अजगर के तोर डारी लगे हे जुड़ा महामंडल जुड़ा
उड़ान -जब शेष नाग तोर बइला बने हे
डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
अंतरा -3
जब काहेन के तोर नाहना बने हे काहेन लागय जोता
जब काहेन के तोर नाहना बने हे काहेन लागय जोता
उड़ान -जब काहेन के तोर ओरी बने हे
डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
अंतरा -4
जब डोमी के तोर नाहना बने हे पिरपिटी बने हे जोता
जब डोमी के तोर नाहना बने हे पिरपिटी बने हे जोता
उड़ान -जब बिच्छू के तुतारी बने हे
डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
अंतरा -5
जब काकर हावय आरी अउ बारी काकर हावय फुलवारी
जब काकर हावय आरी अउ बारी काकर हावय फुलवारी
उड़ान -जब काकर हावय केरा अउ बाड़ी
डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
अंतरा -6
जब लंगूरे के हावय आरी अउ बारी माता के हे फुलवारी
जब लंगूरे के हावय आरी अउ बारी माता के हे फुलवारी
उड़ान -जब पारबती के केरा अउ बाड़ी
डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
भोला जोतय ओ नागर मा डोंगरी के तीरे तीर हां
गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी मं)
“भोला जोतय ओ नागर मा, डोंगरी के तीरे तीर हां”
ए पंक्ति मं भगवान भोलेनाथ के साधारण जीवन अउ करुणा भाव के सुंदर चित्रण हव।
भोला = भगवान शिव, सरल, निष्कपट
जोतय ओ नागर मा = हल चलावत हवंय, किसान जइसे मेहनत करत
डोंगरी के तीरे तीर = पहाड़, जंगल, प्रकृति के बीच
गीत ये बताथे के भोलेनाथ राजमहल मं नई, बल्कि डोंगरी-पहाड़, जंगल, आदिवासी इलाका मं वास करथें।
वो किसान जइसे हल चलाथें, पशु-पक्षी, कीट-पतंग, नाग, बिच्छू सबो के रक्षक हवंय।
अंतरा मं आथे –
काहेन (सांप), अजगर, शेषनाग – शिव के गहना
डोमी, बिच्छू, पिरपिटी – डराय वाले जीव भी शिव के सेवा मं
पारबती, लंगूरे, माता के फुलवारी – शिव परिवार अउ प्रकृति के मेल
👉 मतलब साफ हे –
भोलेनाथ सबो जीव-जंतु, गरीब-अमीर, मनखे-जानवर मं भेद नई करंय।
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🌿 गीत के धार्मिक अउ सांस्कृतिक महत्व
छत्तीसगढ़ी लोक आस्था
ए गीत मं शिव के रूप बिलकुल लोकदेवता जइसे हे –
किसान, गोंड, आदिवासी समाज के आराध्य।
प्रकृति पूजा
नाग, बिच्छू, डोंगरी, जंगल – सबो शिव के संग जुड़के प्रकृति संरक्षण के संदेश देथें।
समानता के भाव
शिव न राजा-रानी देखथें, न अमीर-गरीब।
जऊन जइसे हे, ओला अपन लेथें।
जसगीत परंपरा
ए गीत नवरात्र, सावन, महाशिवरात्रि मं जसगीत रूप मं गाये जाथे।
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कहानी छत्तीसगढ़ी भाषा में
(गीत “भोला जोतय ओ नागर मा” के भाव पर आधारित)
🌄 डोंगरी के तीरे तीर
डोंगरी के तीरे तीर एक छोटे गांव रहिस – नागरपारा।
चारो कोती जंगल, बीच मं पहाड़, अउ पहाड़ के छांव मं बस गे रहिस ए गांव।
इही गांव मं सबो मनखे एक संग रहिन – किसान, गोंड, चरवाहा, मजदूर।
गांव वाले हर बिहान एके बात कहिन –
“आजो भोला जोतत होही डोंगरी तीर।”
🚜 भोला किसान
भोला कऊनो राजा नई दिखत रहिस।
ना रेशमी कपड़ा, ना सोने के गहना।
सिर मं जटा, देह मं भस्म, अउ हाथ मं नागर (हल)।
जब वो खेत मं उतरय, धरती खुद हरियर हो जाथे।
जहां भोला जोत दे, उहां अकाल नई आवय।
🐍 काहेन अउ अजगर
एक दिन गांव के लइका डर के भागत रहिन – “काहेन! काहेन!”
भोला हंस के कहिस –
“डर काबर? ए तो मोर डारी आय।”
काहेन शिव के गर मं हार जइसे लिपट गे।
अजगर, शेषनाग – सबो ओकर सेवक बन गेन।
🦂 बिच्छू अउ पिरपिटी
एक झोपड़ी मं बिच्छू रहिस।
लोगन डरथें, मार देना चाहथें।
भोला रोक दिस –
“ए तो मोर तुतारी आय।”
तब ले गांव मं कऊनो जीव मारे नई जावय।
सब जान गे – जीव हिंसा पाप हे।
🌺 पारबती के फुलवारी
डोंगरी के पिछू पारबती मइया के बाड़ी रहिस।
केरा, फुल, हरियर साग – सब लहलहात रहिस।
लंगूरे पहरा देथें,
माता खुद फुलवारी संवारथे।
🌧️ दुख के दिन
एक बछर गांव मं सूखा पर गे।
नदी सूख गे, खेत फट गे।
सबो गांव वाले डोंगरी चढ़ के बोले –
“भोला! हमन ला बचा ले।”
भोला नागर उठाइस,
डोंगरी के तीरे जोत दिस।
धरती कांपे, बादर गरजे,
मूसलाधार पानी बरस परे।
🙏 सच्चा देव
गांव वाले कहिन –
“भोला देव नई, हमर संगी हे।”
वो मंदिर मं नई,
धरती मं, हल मं,
पसीना मं बसथे।
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🔱 सीख
ए कहानी सिखाथे –
भगवान मेहनत मं बसथे
प्रकृति के रक्षा जरूरी हे
सब जीव समान हवंय
सच्ची भक्ति अहंकार छोड़ मं हे
✨ निष्कर्ष
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“भोला जोतय ओ नागर मा” सिर्फ गीत नई,
ये छत्तीसगढ़ के माटी के दर्शन आय।
ए गीत हर मनखे ला सिखाथे –
भगवान खोजे मंदिर मं नई,
वो तो डोंगरी, खेत अउ मेहनत मं बसथे।



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