जनम देवईया कुंती मईया कईसन करम कमाय | कर्ण जन्म कथा जसगीत |

जबरदस्त जस गीत । कोख भीतर ले बेटा जनम ले । जय बजरंग जस परिवार ग्राम बोडेना भरदाकला । Jas jhanki.jpg

जनम देवईया कुंती मईया कईसन करम कमाय | कर्ण जन्म कथा 

गीत -जनम देवईया 
विषय -कर्ण जन्म कथा
स्वर - 
गीतकार -
यूट्यूब - mgks production 
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 
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गीत के बारे में 

"जनम देवईया कुंती मईया कईसन करम कमाय" एक अत्यंत मार्मिक छत्तीसगढ़ी कथा जसगीत हे। ए गीत म महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जन्म ले लेकर गंगा म बहाय जइय्या तक के पूरा प्रसंग ला भावुक ढंग ले गाये गे हे। गीत माता कुंती के ममता, समाज के डर, ऋषि दुर्वासा के वरदान, सूर्यदेव के आशीर्वाद अउ अधिरथ-राधा के पालन-पोषण के कथा ला सरल छत्तीसगढ़ी भाषा म प्रस्तुत करथे। ए गीत सुनइया के मन म ममता, त्याग, करम अउ भाग्य के गहिरा संदेश छोड़ जाथे।

मुखड़ा 

नम देवईया कुंती मईया कईसन करम कमाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2 

उड़ान - कुंती मईया जनम देवईया ,जनम देवईया कुंती मईया

कईसन करम कमाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2 

अंतरा -1 

यहो माता के मया होंगे जऊहर ,कईसन सकल संसारी गा 

माता पुराये मया ल सुघ्घर ,लोक लईका के दारी गा 

होंगे कइसे आन चरित्तर सुनव सुनव संगवारी गा 

माता कइसे कुमाता बरोबर करे अतीत बड़ भारी गा 

उड़ान - वेद लिखइया --------व्यास गुनईया -2 

महाभारत हे लिखाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2 

अंतरा -2  

यहो द्वापर जुग के कहानी बताये ऋषि मुनि गुण गाये गा 

सूरसेन एक राजा रहाये मथुरा के राज चलाये गा 

ओकरे बेटी कुंती कहाये कैना कुवारी जनाये गा 

14 बछर के उमर गढ़ाये रूपरंग रूप छाये गा 

उड़ान - गोद लेवईया  --------राजा हे भईया  -2 

कुंती भोज कहाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2 

अंतरा -3   

यहो दुर्वासा के सेवा बजाये कुंती कैना कुमारी गा 

महामंतर वो मुनि ले पाये इच्छित वर भारी गा 

एकदिन मंतर धियान लगाये सुमरे सुरुज ल कुवारी गा 

सुरुज नारायण प्रगट आये रात परे अंधियारी गा 

उड़ान - रात पुरइया --------रात्रि हे करिया  -2 

माया माया मा सनाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2

अंतरा -4    

यहो रहे गरब म कुंती कुवारी मनमन म पछताये गा 

होंगे आनी अतीत हां भारी गुनगुन जी घबराये गा 

दीहि मोला ये दुनिया दारी कइसे मुहू लुकाये गा 

दसवा महीना के लगे हे भारी बेटा ल जनम धराये गा 

उड़ान - बने हे मईया  --------कुंती सेवइया -2 

गोदी में ललना खेलाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2

अंतरा -5    

यहो हीरा बरोबर लइका आये मुहरण तेज समाये गा 

कान म कुण्डल कवच बँधाये गौरा बदन झलकाये गा 

लोक लाज के गर हे छाये कुंती गूंज भुजाये गा 

कहा जावव का करव उपाये अईसन सनसो समाये गा 

उड़ान - जग हे हसैया  --------हसही नगरिया -2 

चोला म दाग लगाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2

अंतरा -6     

यहो कइसे माता ममता लुकाये आँखि ले आंसू बोहाये गा 

तरी तरी ओला घुना खाये साथी ल पखरा बनाये गा 

कठवा के संदूक तुरते आये लईका ल ओमा सुताये गा 

जग बदनामी के डर हां सताये गंगा में लेके भोहाये गा 

उड़ान - रोये हे भईया   --------संग  छोड़इया -2 

मया के अचरा छोड़ाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2

अंतरा -7      

यहो आधी रात हे रथ के चलइया भिस्मा के रथ ल हाके गा

 हस्तिनापुर के वो रहवईया धरे पेटारी लगायेगा 

होंगे परसन भरी मईया सुघ्घर लईका पाके गा 

लाने घर म जतन करइया मनमन म हरसागे गा 

उड़ान - कोरा ओढ़ैया    --------राधा ओ मईया -2 

माता के ममता पुराय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2

अंतरा -8 

जात करम लईका के कराये करण नाव धराये गा       

यदाई ददा बन मया पुराये खेले संग म खेलाए गा 

झूलना झुलाये लोरी गाये सगरो दुलार पुराये गा 

जनम देवइया ले बढ़ के कहाये पोसे हिरदय लगाये गा 

उड़ान - ममता के छईहा     --------धरे हे बईहा -2 

बेरा हा सुख ल पाय 

कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2

अंतरा -9  

ये दुनिया म काये होवत हे माता के ममता नदाये गा 

बिना दाई के लईका रोवत हे घोर कलजुग हा भराये गा 

करम के बोझा बोहत हे करनी करईया भगाये गा 

दाई दयालु संहवत सोवत हे गुरु परसाद ल पाये गा 

जनम देवइया ले बढ़ के कहाये पोसे हिरदय लगाये गा 

उड़ान - जय बजरंग हे  --------जस के गवईया  -2 

राहि चरण शीतला 

                    कोख भीतर ले बेटा जनम ले गंगा म लेके भोहाय -2 

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गीत के अर्थ

ए गीत महाभारत के सबसे भावुक घटना मन म ले एक घटना – कर्ण के जन्म – के वर्णन करथे।

गीत म बताय गे हे कि कुंती ला ऋषि दुर्वासा ले वरदान मिलिस। उत्सुकता वश सूर्यदेव के आवाहन करे के बाद कर्ण के जन्म होइस। कुंती अविवाहित रहिस, एकर सेती समाज के डर ले अपन नवजात बेटा ला एक संदूक म रखके गंगा नदी म बहा दिस।

बाद म अधिरथ अउ राधा ओ लइका ला अपन बेटा बनाके पालिन-पोसिन। ए गीत जनम देइया अउ पालन करेइया दुनों माता-पिता के महत्व ला सुंदर ढंग ले बताथे।

गीत की विशेषता

1.महाभारत के कर्ण जन्म कथा ऊपर आधारित।

2.छत्तीसगढ़ी लोक शैली म र केचे गे हे।

3.माता के ममता अउ त्याग के मार्मिक चित्रण।

4.धार्मिक कार्यक्रम मन म गाये जाथे।

5.कथा अउ भक्ति के सुंदर संगम।

6.सरल भाषा, गहिरा सं भीदेश।

7.समाज के डर अउ ममता के संघर्ष ला दिखाथे।

8.पालन-पोषण करेइया माता-पिता के महिमा बताथे।

9.श्रोता मन ला भावुक कर देथे।

10.आध्यात्मिक अउ नैतिक शिक्षा देथे।

कथा

महाभारत के समय म राजा सूरसेन के बेटी कुंती ऋषि दुर्वासा के सेवा करिस। खुश होके ऋषि ओला एक दिव्य मंत्र दिन, जेन ले वो काकरो देवता ला बुला सकत रहिस।

एक दिन कुंती उत्सुकता म सूर्यदेव के स्मरण करिस। सूर्यदेव प्रकट होइन अउ दिव्य वरदान स्वरूप कर्ण के जन्म होइस। कर्ण जन्म लेच कवच अउ कुंडल पहिरे रहिस।

कुंती अविवाहित रहिस। समाज के बदनामी के डर ले ओकर मन घलो टूट गे। आखिर म भारी मन ले अपन नवजात बेटा ला एक लकड़ी के संदूक म रखके गंगा म बहा दिस।

गंगा म बहत संदूक ला अधिरथ सारथी अउ ओकर पत्नी राधा पाइन। दुनों झन निःसंतान रहिन। ओमन कर्ण ला अपन बेटा बनाके बड़े मया ले पालिन-पोसिन।

कर्ण बड़े होके दुनिया के महान धनुर्धर, दानवीर अउ महाभारत के सबसे सम्मानित वीर मन म गिनाय गीस।

ए कथा सिखाथे कि जनम देइया महान होथे, फेर पालन-पोषण करेइया घलो ओतके सम्मान के अधिकारी होथे। ममता, त्याग, करम अउ भाग्य के संदेश ए गीत के मूल भावना आय।

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