गंगा अस्नान्दे गीत – पंचराम मिर्झा | छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स, अर्थ और कहानी
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गीत-गंगा अस्नान्दे
गायक - पंचराम मिर्झा, दिलीप मिर्झा
गीत लेबल-पारंपरिक , पचरा गीत
म्यूज़िक कंपनी - सुंदरानी
वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
येदे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे,
मोर चले भवानी झूमरत झूमरत गंगा अस्नान्दे।
(1)
हरियर हरियर पोलका पहिरे, हरियर पहिरे लुगरा-2
उड़ान - येदे हरियर हरियर हाथ के चुरी खन खन खनके हो रे हो,
येदे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे,
मोर चले भवानी झूमरत झूमरत गंगा अस्नान्दे।
(2)
कारी कारी भौह दिखे तोर, कारी काजर अंजाये -2
उड़ान - येदे कनिहा ले तोर कारी कारी चुंदी छारियाए ए हो,
येदे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे,
मोर चले भवानी झूमरत झमरत गंगा अस्नान्दे।
(3)
लाली एड़ी के माहुर, लाली माथ के टिकली चमके -2
उड़ान - ये दे मांग में वो तोर लाली लाली सेंदुर भराए ए हो,
ये दे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे,
मोर चले भवानी झूमरत झूमरत गंगा अस्नान्दे।
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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी मा)
🔹 मुखड़ा के अर्थ:
एमा भक्त माता महामाई ला गंगा स्नान बर जात देखथे। माता झूमत-झूमत, खुश होके गंगा नहाय बर जाथे। ये दृश्य भक्ति अउ आनंद ले भरपूर हवय।
🔹 अंतरा 1 के अर्थ:
माता हरियर रंग के लुगरा अउ पोलका पहिरे हवे, हाथ म चूरी खनखनात हवय। ये सब खुशी, समृद्धि अउ सुंदरता के चिन्ह हवय।
🔹 अंतरा 2 के अर्थ:
माता के कारी भौंह अउ काजर ले सजे आंखी, बहुत सुंदर दिखत हवय। उनकर रूप देखके भक्त मन मोहित हो जाथें।
🔹 अंतरा 3 के अर्थ:
माता के एड़ी मा माहुर अउ माथा मा टिकली चमकत हवय, मांग म सिंदूर भराय हवय। ये सब सुहाग अउ शक्ति के प्रतीक हवय।
🔶 🌼 गीत के महत्व
गंगा अस्नान्दे जस गीत म माता के गंगा स्नान के महत्व ला बताय गे हवय। गंगा स्नान हिंदू धर्म म बहुत पवित्र माने जाथे। ये गीत हमन ला सिखाथे कि माता के भक्ति ले जीवन म सुख, शांति अउ समृद्धि मिलथे।
ये गीत गांव-गांव म नवरात्रि अउ जगराता म गाये जाथे, जेन ले माहौल भक्तिमय हो जाथे
🔥 गंगा अस्नान्दे – एक भक्ति भरी कहानी
एक समय के बात आय, छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव म लोगन मन बहुत श्रद्धा ले महामाई के पूजा करत रहिन। गांव म हर साल नवरात्रि के समय बड़े धूमधाम ले जस गीत गाये जाथे।
ओही गांव म रामसाय नाम के एक गरीब किसान रहिस। वो बहुत सरल अउ सच्चा मनखे रहिस। वो हर दिन महामाई के पूजा करिस अउ अपन मन के बात माता से कहिस।
एक दिन रामसाय सपना म देखिस कि महामाई खुद गंगा स्नान बर जात हवे। माता हरियर लुगरा पहिरे रहिन, हाथ म चूरी खनखनात रहिस अउ वो झूमत-झूमत गंगा तीर जावत रहिन।
सपना देखके रामसाय के मन म बहुत खुशी होइस। वो सोचिस – “अगर मैं माता के गंगा स्नान के दर्शन करहूं, त मोर जीवन धन्य हो जाही।”
दूसर दिन वो गंगा तीर जाय के ठान लेइस। वो बिना कुछ सोचे, लंबा सफर तय करत गंगा पहुंच गे।
गंगा तीर म बहुत भीड़ रहिस। सबो मनखे गंगा स्नान करत रहिन अउ माता के जयकारा लगावत रहिन।
रामसाय चुपचाप एक कोना म बैठ के माता के ध्यान करय लागिस। अचानक ओकर सामने एक अद्भुत प्रकाश दिखाई दिस।
ओ प्रकाश के बीच म महामाई प्रकट हो गइन। वो हरियर लुगरा पहिरे रहिन, माथा म टिकली चमकत रहिस अउ मांग म सिंदूर भराय रहिस।
माता झूमत-झूमत गंगा म प्रवेश करिन अउ स्नान करिन। ओ समय पूरा वातावरण दिव्य होगे।
रामसाय के आंखी ले आंसू बहाय लागिस। वो माता के चरण म गिर गे अउ कहिस – “माई, मोला अपन भक्ति म लगा लेव।”
माता मुस्कुराइन अउ कहिन – “जो सच्चा मन ले मोर भक्ति करथे, ओला मैं खुद दर्शन देथंव।”
ए कहिके माता अंतर्धान हो गइन।
रामसाय गांव लौट के सब ला ये बात बताइस। धीरे-धीरे पूरा गांव म ये कथा फैल गे।
तब ले हर साल गांव म गंगा अस्नान्दे जस गीत गाये जाय लागिस।
लोगन मन मानथें कि जेन मन सच्चा भक्ति ले ये गीत गाथें, ओखर जीवन म सुख-शांति जरूर आथे।
🔶 🎤 गायक परिचय
पंचराम मिर्झा अउ दिलीप मिर्झा छत्तीसगढ़ी जस गीत के प्रसिद्ध गायक हवंय। इनकर गाये भजन मन आज घलो गांव-गांव म बहुत लोकप्रिय हवय।
🔶 🔚 निष्कर्ष
गंगा अस्नान्दे जस गीत केवल एक भजन नई, बल्कि भक्ति अउ आस्था के प्रतीक हवय। ये गीत हमन ला सिखाथे कि सच्चा मन ले माता के भक्ति करे ले जीवन सफल हो जाथे।।



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