मोर दुर्गा दाई के गांव – दुकालू यादव जस गीत लिरिक्स | CGJasLyrics

मोर दुर्गा दाई के गांव – छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

मोर दुर्गा दाई के गांव छत्तीसगढ़ी जस गीत गायक दुकालू यादव माता दुर्गा भक्ति

मोर दुर्गा दाई के गांव के परिचय

“मोर दुर्गा दाई के गांव” एक सुंदर छत्तीसगढ़ी माता सेवा अउ जस गीत आय। ए गीत म माता दुर्गा के गांव के प्राकृतिक सुंदरता, पीपर के छांव, चिरई-चिरगुन के मधुर आवाज अउ माता के भक्ति के मनमोहक वर्णन करे गे हे।

ए गीत के गायक दुकालू यादव हें। गीत म गांव के बिहान के वातावरण, पीपर के रूख म बइठे चिरई मन के चहचहाहट अउ माता दुर्गा के नाम जपे के सुंदर झांकी दिखथे। ए गीत माता रानी के प्रति श्रद्धा, प्रेम अउ भक्ति के भाव जगाथे।

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गीत के प्रकार: छत्तीसगढ़ी जस गीत
भक्ति के विषय: माता दुर्गा
YouTube चैनल: Bhakti KK Cassetts
वेबसाइट: CGJasLyrics.com
वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे

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 मोर दुर्गा दाई के गांव

कौआ हा करत हे काव अउ पीपर के हे छाँव-2 

मोर दुर्गा दाई के गांव,मोर दुर्गा दाई के गांव,

 मोर मोर दुर्गा दाई के गांव,मोर दुर्गा दाई के गांव-2 

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पीपर के रूखवा में बईठके ,माता के नाव रटत हे 

कोयली पड़की सुवा परेवना ,दुर्गा दुर्गा जपत हे 

उड़ान - चिरई मंन करे चीव चाव -2 

मोर मोर दुर्गा दाई के गांव,मोर दुर्गा दाई के गांव-2 

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पंछी मन के पीपर बछेरा ,एक जगह सकलाये 

सूत उठ के बड़े फजर ले ,माता जी ला उठाये 

उड़ान - माता के परत हे पाँव  -2 

मोर मोर दुर्गा दाई के गांव,मोर दुर्गा दाई के गांव-2 

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मन हर लेथे चिरई चिरगुन ,चीव चीव जब करथे 

माता के अंगना माता के भुवना ,संझा बिहनिया दमके 

उड़ान - जब प्रेम के जस ला सुनाव  -2 

मोर मोर दुर्गा दाई के गांव,मोर दुर्गा दाई के गांव-2 

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 गीत के भावार्थ

ए गीत के भाव ये आय कि माता दुर्गा के गांव बहुत सुंदर अउ भक्तिमय हे। गांव म पीपर के छांव हे, चिरई-चिरगुन के मीठ आवाज हे अउ चारों मुड़ा माता के नाम के गूंज सुनाई देथे।

कौआ अपन बोली म कांव-कांव करथे। कोयली, पड़की, सुवा अउ परेवना अपन मधुर आवाज म जइसे दुर्गा मईया के नाम जपत हें। बिहान होते ही पंछी मन जाग जाथें अउ अपन चहचहाहट ले माता के सेवा करथें।

गीत के भाव हमन ला बताथे कि प्रकृति के हर जीव म भगवान के महिमा देखे जा सकथे। माता के प्रति सच्चा प्रेम अउ श्रद्धा मनखे के मन ला शांति देथे।

छत्तीसगढ़ी परंपरा अउ जस गायन

छत्तीसगढ़ म माता दुर्गा के भक्ति म जस गीत गाये के पुराना परंपरा हे। गांव-गांव म जस मंडली मन माता के सेवा करथें अउ ढोल, झांझ, मंजीरा अउ दूसर पारंपरिक बाजा के संग भक्ति गीत गाथें।

नवरात्रि, माता सेवा अउ धार्मिक आयोजन म जस गीत के विशेष महत्व रहिथे। “मोर दुर्गा दाई के गांव” जइसन गीत गांव के प्राकृतिक सुंदरता अउ माता के भक्ति ला एक-दूसर ले जोड़थे।

छत्तीसगढ़ी बोली के मिठास, गांव के वातावरण अउ माता के महिमा ए गीत ला खास बनाथे। अइसन गीत मन नवा पीढ़ी ला अपन लोकसंस्कृति अउ भक्ति परंपरा ले परिचित कराथें।

गीत के विशेषता अउ महत्व

1. माता के भक्ति: गीत म माता दुर्गा के नाम अउ महिमा के वर्णन हे।

2. प्रकृति के सुंदरता: पीपर के छांव अउ चिरई-चिरगुन के बोली के सुंदर चित्रण हे।

3. गांव के संस्कृति: गांव के बिहान, हरियाली अउ सहज जीवन के झलक मिलथे।

4. छत्तीसगढ़ी भाषा: गीत म स्थानीय बोली के मिठास अउ अपनापन झलकथे।

5. मन ला शांति: माता के जस सुने ले भक्त मन म श्रद्धा अउ भक्ति के भाव जागथे।

6. लोकपरंपरा के संरक्षण: अइसन गीत छत्तीसगढ़ी जस गायन के परंपरा ला आगे बढ़ाय म सहयोग करथें।

गायक के परिचय

दुकालू यादव

दुकालू यादव छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के क्षेत्र म जाने जाथें। “मोर दुर्गा दाई के गांव” गीत म माता दुर्गा के भक्ति, गांव के वातावरण अउ चिरई-चिरगुन के मधुर बोली के सुंदर चित्रण मिलथे।

ए गीत के माध्यम ले श्रोता मन ला माता के भक्ति अउ छत्तीसगढ़ी गांव के लोकजीवन के झलक देखे-सुने ला मिलथे।

मोर दुर्गा दाई के गांव – भक्ति अउ प्रकृति के सुंदर संसार

एक गांव के कल्पना करव, जिहां चारों मुड़ा हरियाली हे, घर के आघू तुलसी चौरा हे अउ गांव के बीच म एक पुराना पीपर के रूख खड़े हे। ए पीपर के छांव म गांव के मनखे मन बइठके अपन सुख-दुख के गोठियाथें। गांव के वातावरण म एक अलग शांति अउ अपनापन बसे हे।

रात के अंधियार धीरे-धीरे कम होथे। बिहान के पहिली किरन धरती म पड़थे। ओही बेरा पीपर के डारा म बइठे कौआ कांव-कांव करे लगथे। कोयली अपन मीठ बोली सुनाथे। पड़की, सुवा अउ परेवना घलो डारा-डारा म फुदकथें। पूरा गांव चिरई-चिरगुन के आवाज ले गूंज उठथे।

अइसन लगथे, जइसे प्रकृति के हर जीव माता दुर्गा के नाम जपत होवय। गांव के एक कोती माता के मंदिर हे। मंदिर के अंगना म रोज बिहनिया अउ संझा दिया बार के माता के आरती करे जाथे। भक्त मन माता के चरण म फूल चढ़ाथें अउ अपन परिवार के सुख-शांति बर अरजी लगाथें।

गांव के एक भक्त रोज बिहनिया जल्दी उठथे। ओहा माता के मंदिर जाथे अउ पीपर के छांव म कुछ देर बइठके चिरई मन के बोली सुनथे। ओकर मन म विचार आथे कि माता के महिमा सिरिफ मंदिर तक सीमित नइ हे। प्रकृति के सुंदरता, गांव के हरियाली, पंछी मन के मधुर आवाज अउ मनखे मन के आपसी प्रेम म घलो माता के कृपा के अनुभव होथे।

धीरे-धीरे गांव के अउ मनखे मन मंदिर म जुड़थें। कोनो फूल लाथे, कोनो दिया बाती के तैयारी करथे अउ कोनो माता के जस गाथे। जब जस गायन शुरू होथे, तब ढोल-मंजीरा के आवाज संग भक्त मन के स्वर गूंज उठथे। माता के जयकारा ले पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाथे।

गीत के मुखड़ा “मोर दुर्गा दाई के गांव” सुनके भक्त मन अपन गांव के सुंदरता ला महसूस करथें। पीपर के छांव, चिरई मन के चहचहाहट अउ माता के अंगना के उजियारा, सब कुछ एक संग मन म उतर जाथे।

ए कथा के सीख ये आय कि प्रकृति के सम्मान करना, जीव-जंतु मन के प्रति दया रखना अउ अपन गांव के संस्कृति ला सहेजना घलो भक्ति के सुंदर रूप आय। माता के सच्चा सेवा सिरिफ पूजा-पाठ म नइ, बल्कि दूसर मनखे के मदद करना, प्रेम बांटना अउ अपन परंपरा ला बचाके रखना म घलो हे।

“मोर दुर्गा दाई के गांव” गीत हमन ला एही संदेश देथे कि जिहां प्रेम, श्रद्धा, प्रकृति अउ सद्भाव रहिथे, ओही जगह भक्त मन ला माता के गांव जइसन पवित्र लगथे।

अक्सर पूछे जाथे (FAQ)

प्रश्न 1: मोर दुर्गा दाई के गांव गीत के गायक कोन हें?

उत्तर: ए गीत के गायक दुकालू यादव हें।

प्रश्न 2: मोर दुर्गा दाई के गांव कइस प्रकार के गीत आय?

उत्तर: ए छत्तीसगढ़ी माता भक्ति अउ जस गीत आय।

प्रश्न 3: ए गीत म कोन देवी के महिमा गाये गे हे?

उत्तर: ए गीत म माता दुर्गा के महिमा अउ भक्ति के वर्णन हे।

प्रश्न 4: गीत म पीपर के रूख के का महत्व हे?

उत्तर: पीपर के रूख गांव के प्राकृतिक सुंदरता, छांव अउ चिरई-चिरगुन के बसेरा के प्रतीक आय।

प्रश्न 5: ए गीत म कोन-कोन चिरई के उल्लेख हे?

उत्तर: कौआ, कोयली, पड़की, सुवा अउ परेवना के उल्लेख हे।

प्रश्न 6: ए गीत के भावार्थ का आय?

उत्तर: ए गीत प्रकृति के सुंदरता, माता दुर्गा के भक्ति अउ गांव के सांस्कृतिक जीवन के वर्णन करथे।

प्रश्न 7: ए गीत ला कहां पढ़े जा सकथे?

उत्तर: ए गीत के लिरिक्स CGJasLyrics.com म पढ़े जा सकथे।

प्रश्न 8: ए गीत के गीतकार के नाम का आय?

उत्तर: गीतकार के नाम के प्रमाणित जानकारी अभी उपलब्ध नइ हे।

पचरा जस गीत 

  1. डोंगरी पहाड़ म हा – छत्तीसगढ़ी जस गीत

  2. देवी के सिंगारे बर – माता जस गीत

  3. मोरो मन हुलसे – छत्तीसगढ़ी जस गीत

  4. देवी पार्वती हा – छत्तीसगढ़ी जस गीत

  5. जगजोत जलत हे – छत्तीसगढ़ी जस गीत

 CGJasLyrics के बारे म

CGJasLyrics.com छत्तीसगढ़ी जस गीत, माता सेवा गीत, पचरा जस गीत अउ दूसर भक्ति गीत के लिरिक्स पढ़े के एक वेबसाइट आय। इहां छत्तीसगढ़ी बोली-भाषा म गीत के बोल, गीत के परिचय अउ भक्ति-संस्कृति से जुड़े जानकारी उपलब्ध कराय के प्रयास करे जाथे।

हमर उद्देश्य छत्तीसगढ़ी लोकगीत अउ जस गायन के परंपरा ला डिजिटल माध्यम म सहेजना अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचाना आय।

वेबसाइट ऑनर – के के पंचारे

वेबसाइट: https://www.cgjaslyrics.com/

 YouTube चैनल के बारे म

“मोर दुर्गा दाई के गांव” गीत के जानकारी म YouTube चैनल के नाम Bhakti KK Cassetts हे। माता दुर्गा के अइसन भक्ति गीत मन भक्त मन ला जस गायन अउ छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति से जोड़े रखथें।

गीत के मूल वीडियो देखे बर YouTube म “मोर दुर्गा दाई के गांव दुकालू यादव Bhakti KK Cassetts” लिखके खोज सकथव।

 कॉपीराइट अउ स्रोत जानकारी

गीत के नांव: मोर दुर्गा दाई के गांव
गायक: दुकालू यादव
YouTube चैनल: Bhakti KK Cassetts
लिरिक्स वेबसाइट: CGJasLyrics.com
वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे

ए पोस्ट के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी जस गीत के जानकारी अउ भक्ति-संस्कृति ला पाठक मन तक पहुंचाना आय। गीत के मूल बोल, धुन, गायन अउ रिकॉर्डिंग के अधिकार संबंधित गीतकार, संगीतकार, गायक, निर्माता अथवा अधिकारधारी हावे ।

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जय माता दी! 🙏🏻

माता दुर्गा सबो भक्त मन के ऊपर अपन कृपा बनाय रखंय।

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