कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर | कांतिकार्तिक यादव | छत्तीसगढ़ी जस गीत

कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर — शिवशक्ति के हे वास

कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर छत्तीसगढ़ी जस गीत शिवशक्ति भक्ति गीत

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गीत -कंकड़ कंकड़ मा शिव 
गायक -कांतिकार्तिक यादव 
गीतकार -कांतिकार्तिक यादव 
संगीतकार -ओ.पी देवांगन 
यूट्यूब -ओ.पी देवांगन 
वेबसाइट ऑनर -के  के पंचारे 
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मुखड़ा 

कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर मन मा रख बिसवास

आवत जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास

अंतरा -1 

अगम अथाह खोजे हे शिव के मनखे समझ नी पावे 

रूप स्वरुप मा खोजे शिवला माया मा बंध जावय 

माया के पिंजरा जब टूटय पंछी फुर ले उड़ावे 

बिन शक्ति के ये माटी तन सहूये शिव मा समावे 

ताल -देखले अंतर मन मा थोड़कुन -2

देखले अंतर मन मा थोड़कुन,जबतक सास हे आवास

आवत जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  

अंतरा -2 

जड़ मा शिव हे चेतन मा शिव शिव जगत मा सार 

जीव शिव हे तन गढ़ना मा शक्ति हे आधार 

बिन शक्ति के करम जगत मा तन हे शव के समान 

शक्ति शिव के मिलन ये जीव बाती अउ तेल तै जान 

ताल -कांतिकार्तिक साँझ होवत हे -2

जाग जा तैहा साँझ होवत हे छिनछिन करेव उपवास 

आवत जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  

गीत के अर्थ

ये गीत मनखे ला समझाथे कि भगवान शिव सिरिफ मंदिर के मूर्ति मं नइ, बल्कि संसार के हर कण-कण मं बिराजे हवय। मनखे अपन मन के भीतर झांक के देखही त ओकर हिरदय मं घलो शिवशक्ति के वास मिलही।

“आवत-जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास” के मतलब आय कि मनखे के हर सांस भगवान के नजदीकी के संकेत आय। जब तक देह मं सांस चलत हे, तब तक मनखे ला अपन भीतर के शिव तत्व ला पहचानना चाही।

गीत मं माया ला पिंजरा के रूपक मं बताय गे हवय। जब मनखे माया-मोह के बंधन ले ऊपर उठथे, त ओकर आत्मा पंछी जइसने आजाद हो जाथे।

गीत  के विशेषता अउ महत्व

  1. ये गीत शिव अउ शक्ति के एकता के संदेश देथे।
  2. मनखे ला बाहरी आडंबर छोड़के अंतरमन मं भगवान ला खोजे के प्रेरणा देथे।
  3. सांस अउ शिव के संबंध ला बहुत सुंदर रूपक मं प्रस्तुत करथे।
  4. माया-मोह के बंधन ले मुक्त होय के सीख देथे।
  5. जीव, शिव अउ शक्ति के आध्यात्मिक संबंध ला सरल भाषा मं समझाथे।
  6. “कंकड़-कंकड़ मा शिवशंकर” के भाव शिव के सर्वव्यापक स्वरूप ला दर्शाथे।
  7. छत्तीसगढ़ी बोली के सहज शब्द गीत ला लोकभक्ति के रंग देथे।
  8. जस गायन, भजन अउ धार्मिक कार्यक्रम मं गाये बर उपयुक्त भाव रखथे।

गायक अउ गीतकार कांतिका‍र्तिक यादव के परिचय

कांतिका‍र्तिक यादव छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत के क्षेत्र मं अपन गायकी अउ गीत लेखन के माध्यम ले जुड़े कलाकार हवंय। “कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर” जस गीत मं वो गायक अउ गीतकार के रूप मं अपन योगदान दे हवंय। गीत मं भगवान शिव के सर्वव्यापक स्वरूप, शिव-शक्ति के महिमा अउ मनखे के अंतरमन मं बसे शिव तत्व के भाव ला छत्तीसगढ़ी बोली मं सरल अउ भक्तिमय ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।

कांतिका‍र्तिक यादव के गीत लेखन मं भक्ति, आध्यात्मिक विचार अउ लोकभाषा के सुंदर मेल दिखाई देथे। “आवत-जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास” जइसन भावपूर्ण पंक्ति मनखे ला अपन भीतर भगवान के उपस्थिति महसूस करे के संदेश देथे।

गायकी मं भक्ति भावना अउ गीत के आध्यात्मिक भाव ला प्रमुखता देय गे हवय। छत्तीसगढ़ी जस गीत के माध्यम ले शिवभक्ति के संदेश ला श्रोता मन तक पहुंचाय के प्रयास उनके रचना अउ गायन के खास विशेषता आय।

गीत के कथा — छत्तीसगढ़ी में 

बहुत पहिली के बात आय। एक गांव मं एक मनखे रहय, जेन भगवान शिव के बड़े भक्त रहय। वो रोज मंदिर जावत रहय, पूजा-पाठ करत रहय अउ घंटों भगवान के सामने बइठ के शिव के दर्शन मांगत रहय। फेर ओकर मन मं एक सवाल हमेशा उठत रहय—“भगवान शिव आखिर कहां रहिथें?”

एक दिन वो गांव के बाहर एक साधु ला देखिस। मनखे साधु ले पूछिस, “महाराज, मैं रोज शिव के पूजा करथों, फेर मोला शिव के सच्चा दर्शन नइ होवत हे। बतावव, शिव कहां मिलही?”

साधु मुस्कुराइस अउ कहिस, “तैं शिव ला बाहर खोजत हस, एक बेर अपन भीतर खोजके देख।”

मनखे ला साधु के बात समझ मं नइ आइस। साधु ओकर हाथ मं एक कंकड़ रखके कहिस, “ये कंकड़ ला देख। का तैं सोचथस कि इहां शिव नइ हो सकय?”

मनखे कहिस, “महाराज, ये तो साधारण कंकड़ आय।”

साधु कहिस, “जेन तत्व ले ये संसार बने हवय, वो तत्व शिव के बिना कइसे हो सकही? शिव ला केवल रूप मं मत खोज। शिव ला हर कण मं महसूस कर।”

ओकर बाद साधु कहिस, “अब अपन सांस ला देख। सांस भीतर जाथे अउ बाहर आथे। ये सांस चलत हे, मतलब तोर भीतर जीवन हवय। ये जीवन शक्ति बिना देह सिरिफ माटी के पुतला आय।”

मनखे धीरे-धीरे आंखी बंद करिस अउ अपन सांस ला महसूस करिस। ओकर मन शांत होय लगिस। वो पहली बार समझिस कि भगवान ला केवल मंदिर मं खोजे के जरूरत नइ हे। शिव तो ओकर अपन हिरदय के पास हवय।

साधु फेर कहिस, “माया के पिंजरा मनखे ला बाहरी दुनिया मं बांध के रखथे। धन, मान, मोह अउ अहंकार के पीछे भागत-भागत मनखे अपन भीतर के शिव ला भुला देथे। जब माया के पिंजरा टूटथे, तब आत्मा आजाद पंछी जइसने उड़थे।”

मनखे के आंखी मं आंसू आ गिस। वो समझ गिस कि शिव अउ शक्ति अलग नइ हवंय। जीवन मं चेतना शिव आय अउ ओकर चलाय वाली शक्ति शक्ति आय। जइसे बाती अउ तेल बिना दीपक नइ जल सकय, वइसने शिव अउ शक्ति के मिलन बिना जीवन के अर्थ अधूरा आय।

ओ दिन ले वो मनखे मंदिर जाना नइ छोड़िस, फेर मंदिर के संग अपन अंतरमन मं घलो शिव ला खोजे लगिस। अब वो हर कंकड़ मं शिव, हर जीव मं शिव अउ अपन हर सांस मं शिव के अनुभव करे लगिस।

यहीच गीत के संदेश आय—आवत-जावत हर सांस मं शिव तोर हिरदय के पास हवय।

YouTube चैनल — OP Dewangan के बारे मं

OP Dewangan YouTube चैनल छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत अउ भक्ति गीत मन ला दर्शक मन तक पहुंचाय के माध्यम बने हवय। “कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर” जइसन शिवभक्ति जस गीत के वीडियो के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत के भाव, भक्ति अउ लोकसंस्कृति ला बढ़ावा देय के प्रयास दिखथे।

चैनल मं प्रस्तुत गीत मन छत्तीसगढ़ी बोली, भक्ति भावना अउ धार्मिक विषय-वस्तु ले जुड़े रहिथें। ये चैनल छत्तीसगढ़ी जस गीत पसंद करे वाले श्रोता मन बर उपयोगी मंच बने सकथे।

CG Jas Lyrics के बारे मं

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, पचरा जस, देवी-देवता के भक्ति गीत, आरती, भजन अउ छत्तीसगढ़ के लोकभक्ति परंपरा ले जुड़े गीत के बोल ला एके जगह मं पहुंचाय के प्रयास आय। इहाँ पाठक मन ला गीत के बोल के संग गीत के जानकारी, अर्थ, महत्व अउ छत्तीसगढ़ी संस्कृति ले जुड़े जानकारी घलो मिलथे।

वेबसाइट के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी बोली, लोकभक्ति अउ जस गीत के परंपरा ला डिजिटल माध्यम मं सुरक्षित रखे अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचाय आय।

वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे
वेबसाइट: CG Jas Lyrics

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