तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी | हरीश साहू /शीतला माता के छत्तीसगढ़ी जस गीत
तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी – छत्तीसगढ़ी जस
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गीत -तरिया पार के नीम छाव मा
गायक -हरीश साहू
जस मंडली-जय अम्बिका मानस एवं जस जगराता परिवार कारा (उरला)
गीतकार -धनराज निर्मलकर
गीत लेबल -शीतला जुड़वास
यूट्यूब - सुमित फोटो स्टूडियो
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे
वेबसाइट -cgjaslyrics
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मुखड़ा
तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी -2
उड़ान - डीहिडोंगर के देवी कहाये -हो वो हो
डीहिडोंगर के देवी कहाये
गांव देवी महरानी
तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी
अंतरा -1
हो जगजननी जगतरण के ,महिमा हावे नियारी गा
दाई दयाली जगहितकारी ,शक्ति के अवतारी गा
चण्डमुण्ड ला मारके देवी,चामुंडा नाव धारी गा
दुर्गम मारे दुर्गा कहाये ,हे भगवती महतारी गा
उड़ान - ये जग ला शीतला करईया हो वो हो
ये जग ला शीतला करईया
शीतला माता रानी
रिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी
अंतरा -2
शीतल शीतला मोर दाई ,ग्राम देवी कहाये गा
गांव के डीहीवारिन देवी ,गांव गांव पुजाये गा
शीतला दाई के मंदिर हां ,माता देवाला कहाये गा
शीतला के इक्कीस रूप ,इक्कीस रूप धराये गा
उड़ान - हावे इक्कीस बहिनी के हो वो हो
हावे इक्कीस बहिनी
अइसे नाव निसानी
तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी
अंतरा -3
बड़े दाई बूढ़ी माता ,बाटय दाना चिहारी गा
झलझला अगिया अउ ,मोती अंगार धारी गा
बेमची लाइयाँ खुरा चपका ,उपके अपारी गा
जुड़ीताप सेंदरी माता ,काल स्वरूप धारी गा
उड़ान - गला मा होथे गलवा माता हो--वो --हो
गला मा होथे गलवा माता
शीतला के परमाने
तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी
अंतरा -4
इक्कीस बहिनी मान पावे ,शीतला के रूप कहाये गा
सादा पीताम्बरी हां ,ये जग ला बचाये गा
नाव अनेक शीतला के ,आषाढ़ मा परब आये गा
माता पहुचनी जुड़वास मा ,गांव बस्ती सकलाये गा
उड़ान - माता देवाला मेला भराये हो--वो --हो -2
माता देवाला मेला भराये
लागे दिन सुहानी
तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी
अंतरा -5
जेकर जइसे पूर्ति हे ,वइसे वोहा मनाथे गा
कांचा पक्का जेवन अउ ,मेवा मिठाई चघाये गा
अपन भगत के सेवा मा, शीतला दाई ज़ुराथे गा
शीतल होंगे शीतला दाई ,मया दया बरसाथे गा
उड़ान - धनराज लिखे जुडवासा हो--वो --हो
धनराज लिखे जुडवासा
गुना गुण के कहानी
तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी
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गीत के अर्थ
ये गीत के मूल भाव शीतला माता के भक्ति अउ गांव के लोक आस्था ऊपर आधारित हे। गीत मं माता ला जगजननी, जगत के पालनहारिन, शक्ति के अवतार अउ गांव के रखवारिन कहे गे हे।
“तरिया पार के नीम छांव” माता के शांत अउ शीतल रूप के प्रतीक आय। नीम ला गांव-गंवई मं पवित्र अउ उपयोगी पेड़ माने जाथे, एखर से शीतला माता के शीतलता अउ लोकविश्वास के संबंध अउ गहिरा हो जाथे।
गीत मं माता के अलग-अलग रूप जइसे शीतला, चामुंडा, दुर्गा, बूढ़ी माता, गलवा माता अउ इक्कीस बहिनी के उल्लेख मिलथे। ये सब रूप माता के अलग-अलग शक्ति अउ लोकपरंपरा के प्रतीक मानें जाथें।
गीत के आखिरी हिस्सा मं भक्त मन के श्रद्धा के वर्णन हे। मनखे अपन सामर्थ्य अउ मनोकामना के अनुसार माता ला भोजन, मेवा-मिठाई अउ प्रसाद चढ़ाथे। बदला मं माता अपन भक्त ऊपर मया, दया अउ आशीर्वाद बरसाथें—यही ये गीत के मुख्य संदेश आय।
गीत के विशेषता अउ महत्व
- ये गीत मं शीतला माता के लोक रूप के सुंदर वर्णन मिलथे।
- गीत मं डीही-डोंगर, गांव देवी अउ ग्राम-देवाला के लोकविश्वास झलकथे।
- इक्कीस बहिनी के मान्यता ला गीत के माध्यम ले सामने लाय गे हे।
- नीम के छांव अउ शीतलता के माध्यम ले माता के शांत स्वरूप ला बताय गे हे।
- गीत मं छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई के धार्मिक परंपरा के झलक मिलथे।
- जुड़वासा अउ माता देवाला के मेला जइसन लोक आयोजन के उल्लेख हे।
- सरल छत्तीसगढ़ी बोली के कारण गीत ला गांव के आम मनखे आसानी ले समझ सकथे।
- ये गीत मं भक्ति के संग लोकसंस्कृति अउ परंपरा दुनों के समावेश हे।
- माता के अनेक रूप के वर्णन गीत ला धार्मिक रूप ले महत्वपूर्ण बनाथे।
- जस गीत के माध्यम ले आने वाली पीढ़ी तक लोक आस्था अउ परंपरा पहुंचाय जा सकथे।
गीतकार धनराज के जानकारी
“तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” के गीतकार के रूप मं गीत के अंतिम उड़ान मं धनराज के नाम उल्लेखित हे। धनराज के रचना मं गांव-गंवई के बोली, देवी-देवता के लोकमान्यता अउ छत्तीसगढ़ी धार्मिक परंपरा के प्रभाव देखे बर मिलथे। ये गीत मं शीतला माता के अलग-अलग रूप अउ इक्कीस बहिनी के उल्लेख करके स्थानीय धार्मिक विश्वास ला जस गीत के रूप मं प्रस्तुत करे गे हे।
गायक हरीश साहू के बारे मं
हरीश साहू छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत अउ जस गीत के गायकी ले जुड़े कलाकार आय। “तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” जस गीत मं उनके आवाज के माध्यम ले शीतला भवानी के महिमा अउ भक्ति के भाव ला प्रस्तुत करे गे हे।
उनके गायकी मं छत्तीसगढ़ी बोली के मिठास, देवी भक्ति अउ लोकपरंपरा के भाव ला महत्व मिले हे। शीतला माता के महिमा गावत ये गीत गांव-गंवई के धार्मिक आस्था अउ लोकसंस्कृति संग जुड़त दिखाई देथे।
शीतला भवानी अउ जुड़वासा के कथा
छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई मं शीतला दाई ला बहुत मान-सम्मान के साथ पूजा जाथे। लोकमान्यता मं शीतला माता ला गांव के रखवारिन देवी के रूप मं देखे जाथे। गांव के सुख-शांति, परिवार के मंगल अउ संकट ले बचाव बर मनखे माता के पूजा-पाठ करथें। एखर से शीतला दाई के पूजा केवल मंदिर तक सीमित नइ रहिस, बल्कि गांव के लोकजीवन अउ परंपरा के एक हिस्सा बन गे हे।
पुराना समय मं गांव के आसपास नीम के पेड़ के विशेष महत्व रहिस। नीम के छांव, ओकर पवित्रता अउ शीतलता ला माता के स्वरूप संग जोड़े गे। एही लोकभावना ले गीत मं “तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” जइसन सुंदर पंक्ति बने हे। इहां तरिया गांव के प्राकृतिक जीवन के प्रतीक आय अउ नीम के छांव माता के शीतल मया के प्रतीक बन जाथे।
शीतला माता के लोकपरंपरा मं गांव के अलग-अलग देवी रूप के मान्यता घलो मिलथे। कोनो गांव मं दाई ला डीहीवारिन कहे जाथे, कोनो जगह बूढ़ी माता के रूप मं पूजा जाथे, त कोनो जगह शीतला दाई के संग अलग-अलग बहिनी देवी मन के मान्यता रहिथे। ये गीत मं इक्कीस बहिनी के उल्लेख एही लोकपरंपरा ला दर्शाथे।
जुड़वासा के समय गांव-गांव मं माता के पूजा, प्रसाद अउ सामूहिक आयोजन के माहौल बनथे। भक्त मन अपन श्रद्धा के अनुसार कांचा-पक्का भोजन, मेवा-मिठाई अउ प्रसाद चढ़ाथें। माता देवाला मं मेला भरथे, दूर-दूर ले मनखे पहुंचथें अउ दाई के दरबार मं अपन मनोकामना रखथें।
गीत के भाव ये बताथे कि भक्ति मं दिखावा जरूरी नइ हे। जेकर जइसन सामर्थ्य हे, वो अपन श्रद्धा के अनुसार माता ला मनाथे। माता अपन भक्त मन ऊपर मया अउ दया बरसाथें—यही लोकविश्वास शीतला जस गीत के केंद्र मं हे।
ए गीत मं देवी के शक्ति के संग छत्तीसगढ़ के मिट्टी, गांव, तरिया, नीम, मेला अउ लोकपरंपरा के सुंदर चित्र दिखाई देथे। एखर से ये केवल एक जस गीत नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति अउ शीतला माता के प्रति जनआस्था के भावपूर्ण अभिव्यक्ति घलो आय।
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