गरबा रास लीला माचे /पुनीत साहू/परमानंद कठोलिया/cgjaslyrics
मुखड़ा
गरबा रास लीला माचे, गरबा रास लीला माचे
झूमर झूमर डंडा नाचे, झूमर झूमर डंडा नाचे
उड़ान - हो अम्बे माता दरबार हो
आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो
झूला में अंबे सुहावे, भैरव लगुरवा झुलावे -2
हो झलके 16 सिंगार हो
आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो
//1//
नव झन कुंवार कैना सजे समरे आनी बानी
डांडिया नाचा नाच के ठुमके झूमर झूमर के सुहानी
उड़ान - परसन हो माता रानी , आदि शक्ति हे महारानी -2
हो बाजे डंडा ठहकार हो
आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो
//2//
डांडिया ताल ताल में खनके खुनूर खुनूर पैरी
छुनुर छुनुर पैरी बाजे रंग के मताये गैरी
उड़ान - बछर भर मे आथे अबीर गुलाल उड़ाथे -2
हो अंबे माता के दुवार हो
आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो
//3//
गद गद हो नव दुर्गा दाई नव कैना के रूप धरे
नाचे गाए नव कैना संग सुर में दाई सुर भरे
उड़ान - तकधिन ता ताता थैया झूमरत हेअंबा मईया-2
हो पूरा करत हे दुलार हो
आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो
//4//
नव कन्या संग नव दुर्गा कुंवारी भोजन करें
मन वांछित भर देखे दाई भगत के दुःख हरे
उड़ान - नांदगांव नंदई होलिया रहीथे परमानंद कठोलिया-2
हो देवे अल्हण ला टार हो
आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो
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🌼 भक्त मन के पसंदीदा जसगीत संग्रह
शीतला दाई जसगीत – सेवा म सेउक आये
जगमग जोत जले– नवरात्रि विशेष गीत
गीत के अर्थ
ये जसगीत म माता Ambe Mata के नवरात्रि दरबार के सुंदर चित्रण करे गे हे।
गीत म गरबा, डांडिया, नव कन्या पूजा, माता के सिंगार अउ भक्त मन के भक्ति भाव ला बहुत सुंदर ढंग ले बताय गे हे। ये गीत मंच कार्यक्रम, माता सेवा, जगराता अउ नवरात्रि उत्सव बर बहुत लोकप्रिय हो सकथे।
गीत के “गरबा रास लीला माचे, झूमर झूमर डंडा नाचे” लाइन बताथे कि माता के दरबार म खुशी, उत्साह अउ भक्ति के माहौल बने रहिथे। सब झन संगीत के ताल म नाचत-गावत माता के आराधना करथें।
गीत म “झूला में अंबे सुहावे” कहिके माता के सुंदर रूप अउ सोलह श्रृंगार के वर्णन करे गे हे। माता अपन भक्त मन ला प्रेम, दया अउ आशीर्वाद देवत हवंय।
गीत के आगे के अंतरा म नव कन्या पूजा के महत्व बताय गे हे। कन्या मन ला माता के रूप मानके भोजन कराय जाथे, सेवा करे जाथे अउ आशीर्वाद लेय जाथे।
पूरा गीत के संदेश ये आय कि माता के सच्चा भक्ति ले जीवन के दुख, परेशानी अउ बाधा दूर हो सकथे, अउ घर-परिवार म सुख, शांति अउ समृद्धि आ सकथे।
गीत के विशेषता
ये जसगीत म माता Ambe Mata के नवरात्रि दरबार के सुंदर चित्रण करे गे हे।
गीत म गरबा, डांडिया, नव कन्या पूजा, माता के सिंगार अउ भक्त मन के भक्ति भाव ला बहुत सुंदर ढंग ले बताय गे हे। ये गीत मंच कार्यक्रम, माता सेवा, जगराता अउ नवरात्रि उत्सव बर बहुत लोकप्रिय हो सकथे।
कथा – गरबा रास लीला माचे
एक समय के बात आय, एक छोटे गांव म हर साल Navratri के भव्य आयोजन होवत रहिस। गांव के सब झन मिलके माता के दरबार सजावत रहिन। फूल, दीपक अउ रंगोली ले पूरा मंदिर चमकत रहिस।
रात होतही ढोलक के आवाज गूंजे लगिस। गांव के बहिनी-बेटी मन रंग-बिरंगा कपड़ा पहनके गरबा नाचे लगिन। हर हाथ म डांडिया, हर चेहरा म खुशी।
अचानक एक बुजुर्ग भक्त कहिस— “जिहां सच्चा भक्ति होथे, उहां माता खुद आशीर्वाद देथे।”
उही रात एक छोटी कन्या मंदिर आइस। ओकर चेहरा म अलग चमक रहिस। जेन-जेन ओकर दर्शन करिस, ओकर मन के दुख दूर होगे। सब समझ गइन— आज माता खुद नव कन्या के रूप म आइन हवंय।
तब ले गांव म ये गीत गाए जाथे—
गरबा रास लीला माचे…
"माता रानी के भक्ति ले भरपूर नवा-नवा जस गीत लिरिक्स पढ़े बर CG Jas Lyrics मं फेर जरूर आवव।"



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