वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय Lyrics | गुड्डा साहू जसगीत | कंक पंछी की वीर गाथा
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गीत - वाह वाह रे पंछी
गायक -गुड्डा साहू
गीतकार -गुड्डा साहू
यूट्यूब - बबला साहू
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2
उड़ान - चिथ चिथ लहू बोहाय
भाई के बदला चुकाय -------भाई के बदला चुका
वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2
अंतरा -1
कनउ कंक भर नाव के पंछी ,वेद पुराण बताये
एक समय मा कंक हा उड़त, जब कैलाश मा जाये
वो कैलाश मा विदु दुरूप के ,दानव एक रहाये
विदु दुरूप तब कंक पंछ ला ,देख के घुच्छा आये
उड़ान - कंक पंछी के मुड़ ला वो दाई -2
दानव हां काट गिराय -------दानव हां काट गिराय
वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2
अंतरा -2
कंक भाई मोर मरगे कहिके ,कंधर खबर हे पाये
आंसू बोहावत वो कंधर हर , फेर कैलाश मा जाये
सोन के आस म बैठके दानव,दारू पियत जाये
मतनी कपत्नी संग दानव हा ,उही तीर म रहाये
उड़ान - उही समय कंधर चिल्लाके -2
रण म हे ओला बुलाय -------रण म हे ओला बुलाय
वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2
अंतरा -3
विधु दुरूप हर तब महामाई ,हे किरपाल उठाये
कंक संग म युद्ध चले ,दानव तलवार चलाये
कंक पंछी अपन चोंच म हे तलवार दबाये
गोड़ म वो तलवार ल रमजय टुकड़ा टुकड़ा हो जाय
उड़ान - तब दानव ल कंक पंछी -2
मार के रण म गिराय ----- -------लक्षमण सिंह जस गाय
वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2
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गीत के बारे म
गीत – वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय
ए गीत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक जसगीत मन म एक अनोखा गाथा गीत आय। एमा एक बहादुर कंक पंछी के कहानी बताय गे हे, जऊन अपन भाई के हत्या के बदला ले बर दानव संग युद्ध करथे। गीत म वीरता, भाईचारा, न्याय अउ माता के कृपा के सुंदर वर्णन मिलथे।
गीत के सरल अर्थ
गीत के मुखड़ा म गायक कंक पंछी के बहादुरी के बड़ाई करत कहिथे कि वो दानव ला मार गिराइस अउ अपन भाई के बदला पूरा करिस। दानव के लहू रणभूमि म बहिस अउ अन्याय के अंत होगे।
पहिली अंतरा म बताय गे हे कि वेद-पुराण म कंक नाम के एक पवित्र पंछी के उल्लेख मिलथे। एक दिन वो कैलाश पर्वत जावत रहिस। उहां विधुदुरूप नाम के दानव रहय। दानव कंक पंछी ला देखके क्रोधित होगे अउ ओकर सिर काट डारिस।
दूसर अंतरा म कंधर नाम के ओकर भाई ला ए दुखद समाचार मिलथे। भाई के मृत्यु के समाचार सुनके वो रोथे, फेर हिम्मत नइ हारय। वो कैलाश जाके दानव ला युद्ध बर ललकारथे।
तीसर अंतरा म दानव अउ कंधर के बीच घमासान युद्ध होथे। माता महामाई के कृपा कंधर ऊपर रहिथे। अंत म कंधर अपन शक्ति, साहस अउ माता के आशीर्वाद ले दानव ला परास्त करके रणभूमि म गिरा देथे।
गीत के विशेषता
1. वीर रस के अद्भुत उदाहरण
ए गीत म वीरता अउ साहस के भाव भरपूर दिखथे। सुनइया मन म जोश भर देथे।
2. भाईचारा के संदेश
गीत सिखाथे कि सच्चा भाई अपन भाई बर हर परिस्थिति म खड़े रहिथे।
3. अन्याय के विरोध
दानव अत्याचार के प्रतीक आय जबकि कंक पंछी न्याय अउ धर्म के प्रतीक आय।
4. माता महामाई के महिमा
युद्ध म विजय माता के कृपा ले मिलथे, ए संदेश गीत म स्पष्ट दिखथे।
5. लोकपौराणिक धरोहर
ए गीत छत्तीसगढ़ के समृद्ध लोकसंस्कृति अउ लोककथाओं के सुंदर उदाहरण आय।
गीत के कथा (विस्तृत कहानी)
बहुत पुराना समय के बात आय। कैलाश पर्वत के आसपास एक भयंकर दानव विधुदुरूप के आतंक रहिस। वो संत, साधु अउ निर्दोष जीव मन ला परेशान करत रहिस।
उही समय कंक नाम के एक पवित्र पंछी कैलाश दर्शन बर निकलिस। वो धर्म, भक्ति अउ सत्य के प्रतीक मानाय जाथे। जब वो कैलाश पहुंचिस त दानव ओकर उपस्थिति ला सहन नइ कर सकिस। क्रोध म आके दानव ह कंक पंछी के हत्या कर दिस।
ए घटना के समाचार जब ओकर भाई कंधर तक पहुंचिस त वो दुख ले भर गीस। फेर वो केवल रोय नइ, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ई करे के संकल्प ले लिस।
कंधर कैलाश पहुंचिस। उहां दानव अपन घमंड म डूबे रहिस। कंधर ह खुलेआम ओला युद्ध बर ललकारिस। दानव ह तलवार निकालिस अउ भयंकर युद्ध सुरू होगे।
युद्ध के दौरान माता महामाई के कृपा कंधर ऊपर बरसत रहिस। कंधर के साहस बढ़त गीस। आखिरकार वो दानव के घमंड ला चूर-चूर कर दिस अउ ओकर अंत कर दिस।
दानव के मृत्यु संग न्याय के जीत होइस अउ भाई के बदला पूरा होगे। ए कारण गीत म "भाई के बदला चुकाय" के पंक्ति बार-बार गाये जाथे।
CG Jas Lyrics
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