जगमग जोत जले /आरू साहू/जसगीत
गीत -जगमग जोत जले
स्वर -आरु साहू
गीतकार -दास मनोहर
संगीत -मनोज पुष्पेंद्र
वेबसाइट ऑनर - कैलाश पंचारे
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जग मग जोत जले
जगमग जोत जले हो मईया जगमग जोत जले -२
जब ले आये नवरात भगतन के जागे भाग -२
अंतरा -1
गांव गली खोर तीरथ लागे जगा जगा तोर धाम
जागे जंवारा नवराति म बन जाथे बिगड़े काम -2
उड़ान -"खाली झोली भरे ओ मईया खाली झोली भरे"-२
जब ले आये नवरात भगतन के जागे भाग -२
जगमग जोत जले हो मईया जगमग जोत जले -२
अंतरा -2
तोर सेवा अउ पूजा ओ दाई सेवा भगति भाव
जियत भर मै हर तोर पावव तोर अचरा के छाव -2
उड़ान -"सब जग फुले फरे हो मईया सब जग फुले फरे "-२
जगमग जोत जले हो मईया जगमग जोत जले -२
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गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi)
“जगमग जोत जले” गीत म माता रानी के महिमा के बखान करे गे हवय। जब नवरात्रि आवत हे, त पूरा गांव-गली म माता के जोत जल जाथे अउ भक्त मन के भाग्य जाग जाथे।
गीत म बताय गे हवय कि माता के भक्ति करे ले हर दुख दूर हो जाथे अउ खाली झोली भर जाथे। जऊन मन सच्चा मन ले सेवा करथे, माता ओकर हर मनोकामना पूरा करथे।
माता के अंचरा (आंचल) के छांव म जीवन सुखमय बन जाथे अउ पूरा संसार खुशहाल हो जाथे।
🟣 गीत के विशेषता (Features / Visheshata)
✔ नवरात्रि विशेष जसगीत
✔ गांव-गांव म गाये जाथे
✔ माता रानी के चमत्कार अउ कृपा के वर्णन
✔ भक्ति, आस्था अउ विश्वास से भरपूर
✔ जंवारा, जोत अउ पूजा के महत्व बताथे
🟤 कहानी (Chhattisgarhi Story)
छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव रहिस — “मोखा”। गांव के लोगन बहुत सीधा-सादा अउ मेहनती रहिन। हर साल नवरात्रि के समय गांव म बहुत धूमधाम होवत रहिस।
ओही गांव म एक गरीब परिवार रहिस — रामबाबू अउ ओकर घरवाली सीता। दुनो बहुत मेहनत करथें फेर हालत ठीक नई रहिस। कई दिन तो खाना तक के परेशानी हो जावत रहिस।
एक दिन सीता कहिस —
“ए जी, अबकी नवरात्रि म हमन माता रानी के सेवा करबो, जंवारा बोहबो अउ जोत जलाबो।”
रामबाबू थोड़े उदास होके कहिस —
“हमर हालत देख, पूजा-पाठ बर का करबो?”
सीता मुस्कुराके कहिस —
“माता रानी सब देखथें, सच्चा मन चाही, धन-दौलत नई।”
नवरात्रि सुरू होइस। सीता माटी ले जंवारा बोइस अउ छोट सा दिया म जोत जलाइस। हर दिन वो मन “जगमग जोत जले” जसगीत गावत रहिन।
धीरे-धीरे गांव के लोगन देखिन कि रामबाबू के घर म अजीब बदलाव आथे लागिस। जऊन घर म पहले अंधियारा रहिस, अब उहां हर समय शांति अउ खुशी रहिस।
एक दिन गांव के मुखिया आय के कहिस —
“रामबाबू, तोला काम चाही ना? मोर खेत म काम करबे?”
रामबाबू खुशी-खुशी मान गीस। धीरे-धीरे ओकर हालत सुधरगे। घर म अनाज भरगे, गरीबी दूर होगे।
नवरात्रि के आखिरी दिन सीता माता रानी के सामने हाथ जोड़ के कहिस —
“मईया, मोर झोली भर डारेव, अब दूसर मन के भी भला कर।”
ओही रात सीता सपना देखिस — माता रानी आके कहिन —
“तंय सच्चा भक्ति करे हस, अब तोर घर म हमेशा सुख रहिही।”
अगले दिन ले रामबाबू के जीवन पूरा बदल गे। गांव वाले कहे लागिन —
“देखव, माता रानी के चमत्कार!”
तब ले हर साल गांव म “जगमग जोत जले” जसगीत गाके नवरात्रि मनाय जाथे।



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