ठलहा तै होबे मयारू दाई /गायक - गुड्डा साहू /जस सेवा गीत
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गीत - ठलहा तै होबे मयारू दाई
गायक - गुड्डा साहू
गीतकार - गुड्डा साहू
यूट्यूब - बबला साहू
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
ठलहा तै होबे मयारू दाई वो
चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2
अंतरा -1
नई हे मोर घर मा दाई ,कही आनी बानी
नीचट गरीब हव दाई ,करथव किसानी
जाता में दर के राखेव ,हवव मैं पिसानी
बंगला चटनी संग मा चीख लेबे दाई
उड़ान - पुराये हव मैंहा अंगाकर रोटी वो ,चले आबे ऐती---
ठलहा तै होबे मयारू दाई
ठलहा तै होबे मयारू दाई वो
चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2
अंतरा -2
गंजी ला मांग के दाई लाने हव मै उधारी
कहां के पाहू दाई बड़ा अउ सुहारी
कइसे मोर जिनगी पहाथे देख महतारी
लुगरा पोलखा देहु कहा ले तोला मै निसानी
उड़ान - कुरता पहिरे हावव चिरहा धोती वो ,चले आबे ऐती---
ठलहा तै होबे मयारू दाई---
ठलहा तै होबे मयारू दाई वो
चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2
अंतरा -3
कइसे दरस ला दाई मैंहा तोर पाहू
धोके तोर गोड़ ला दाई मैंहा तर जाहु
जिनगी के काहे भरोसा कब मर जाहु
आबे मोर घर मा दाई भेंट का चघाहू
उड़ान - झुंगू मा नई हे हीरा मोती वो ,चले आबे ऐती---
ठलहा तै होबे मयारू दाई---
ठलहा तै होबे मयारू दाई वो
चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2
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गीत के भावार्थ
“ठलहा तै होबे मयारू दाई” एक अइसन भक्ति गीत आय जेमां एक गरीब किसान अपन दाई (माता रानी) ल अपन घर आके आशीर्वाद देय बर बिनती करत हे। गीत के हर पंक्ति मं सच्चा प्रेम, श्रद्धा अउ समर्पण के भावना झलकथे।
भक्त कहिथे कि ओकर घर धन-दौलत ले भरपूर नइये। न महल हवय, न बड़े-बड़े पकवान हवय। वो त एक साधारण किसान आय, जऊन दिन-रात मेहनत करके अपन परिवार चलाथे। फेर वोला भरोसा हवय कि दाई अपन भक्त के प्रेम ल देखथे, धन-संपत्ति ल नइ।
गीत मं किसान माता ल कहिथे कि मोर घर मं अंगाकर रोटी, बंगला चटनी अउ साधारण भोजन हवय। जऊन कुछ हवय, वोला प्रेम ले परोसहूं। मोर घर छोटे हो सकथे, फेर मोर मन मं तोर बर अथाह श्रद्धा हवय।
दूसर अंतरा मं किसान अपन गरीबी के हालत बताथे। वो कहिथे कि उधार ले कुछ व्यवस्था करे हवंव, फेर मोर बस मं बड़े-बड़े पकवान बनाना नइये। मोर कपड़ा घलो फटे-पुराने हवंय, फेर मोर मन साफ हवय।
तीसर अंतरा मं जीवन के अस्थिरता के बात आय। किसान सोचथे कि जिनगी के कोनो भरोसा नइये। एही से वो माता ल कहिथे कि मोर जीते जी एक बेर मोर घर जरूर आ जा। मोर कोठी मं हीरा-मोती नइये, फेर मोर हृदय भक्ति अउ प्रेम ले भरपूर हवय।
ए गीत हमन ला सिखाथे कि माता रानी बर सबसे बड़ा भोग सोना-चांदी नइ, बल्कि निष्कपट प्रेम, श्रद्धा अउ विश्वास आय।
गीत के विशेषता
1. ग्रामीण जीवन के सजीव चित्रण
ए गीत मं छत्तीसगढ़ के किसान जीवन के सुंदर झांकी देखे ला मिलथे। खेती-किसानी, सादा भोजन अउ संघर्षपूर्ण जीवन के सच्चा चित्रण करे गे हवय।
2. सच्ची भक्ति के संदेश
गीत बताथे कि माता रानी धनवान अउ गरीब मं भेदभाव नइ करय। जेकर मन मं सच्ची श्रद्धा रहिथे, माता ओखर ऊपर कृपा करथे।
3. सरल अउ मधुर भाषा
गीत के शब्द सरल छत्तीसगढ़ी मं लिखे गे हवंय। एखर भाषा सीधे श्रोता के हृदय ल छू लेथे।
4. विनम्रता के उत्कृष्ट उदाहरण
भक्त अपन गरीबी छुपाथे नइ, बल्कि माता के आगू सच्चाई रखथे। ए विनम्रता गीत ल अउ अधिक प्रभावशाली बनाथे।
5. लोक संस्कृति के परिचय
अंगाकर रोटी, बंगला चटनी, लुगरा-पोलखा जइसन शब्द छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ परंपरा के सुंदर परिचय देवत हवंय।
6. भावनात्मक गहराई
गीत सुनके अइसन लगथे जइसे एक भक्त अपन मां संग सीधे बात करत होय। ए आत्मीयता गीत के सबसे बड़ी ताकत आय।



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