गउवा चराये प्रतिपाला | राकेश तिवारी जेओरा | छत्तीसगढ़ी कृष्ण भजन
गउवा चराये प्रतिपाला मोर किशन कन्हैया
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गीत -गउवा चराये प्रतिपाला
गायक -राकेश तिवारी
गीतकार -राकेश तिवारी
यूट्यूब -rakesh tiwari jeora
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे
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गीत के बारे म
“गउवा चराये प्रतिपाला” एक सुंदर छत्तीसगढ़ी कृष्ण भजन आय, जेमां भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप अउ गउवा चराये के मनमोहक प्रसंग ला गीत के माध्यम ले प्रस्तुत करे गे हवय।
गीत म किशन कन्हैया ला गउवा के चरवाहा के रूप म देखाय गे हवय। गउवा, बछड़ा, बन अउ बंशी के संग कृष्ण भगवान के बाल लीलामन के सुंदर झलक ए गीत म मिलथे। सरल छत्तीसगढ़ी बोली के कारण ये भजन ला सुनइया मन आसानी ले समझ सकथें अउ गुनगुना घलो सकथें।
मुखड़ा
गउवा चराये प्रतिपाला मोर किशन कन्हैया
गउवा चराये प्रतिपाला हो माँ
अंतरा -1
कउने रंग गईया हो मईया कउने रंग बछड़ा -2
कउने रंग बछड़ा हो मईया कउने रंग बछड़ा-2
अरे कउने रंग हावे चरवाहा मोर किशन कन्हैया-2
गउवा चराये प्रतिपाला हो माँ
मोर किशन कन्हैया ,गउवा चराये प्रतिपाला हो माँ -२
अंतरा -2
कउने बन मा गईया हो मईया कउने बन मा बछड़ा -2
कउने बन मा बछड़ा हो मईया कउने बन मा बछड़ा-2
कउने बन मा हावे चरवाहा मोर किशन कन्हैया
गईया चराये प्रतिपाला हो माँ
मोर किशन कन्हैया ,गउवा चराये प्रतिपाला हो माँ -२
अंतरा -3
बंशी बन मा गईया हो मईया मधु बन मा बछड़ा -2
मधु बन मा बछड़ा हो मईया मधु बन मा बछड़ा-2
बृंदा बन मा हावे चरवाहा मोर किशन कन्हैया
गईया चराये प्रतिपाला हो माँ
मोर किशन कन्हैया ,गउवा चराये प्रतिपाला हो माँ -२
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गीत के अर्थ
ए गीत म किशन कन्हैया के गउवा चराये के लीला के वर्णन करे गे हवय। गीत म सवाल-जवाब के ढंग ले पूछे गे हवय कि गईया कइसन रंग के हवंय, बछड़ा कइसन रंग के हवंय अउ चरवाहा कोन आय।
आखिर म पता चलथे कि गउवा के चरवाहा अउ सबके मन ला मोह लेवइया मोर किशन कन्हैया आय। बन, बंशी, गउवा अउ बछड़ा के माध्यम ले भगवान कृष्ण के बाल रूप के सुंदर छवि उभर के सामने आथे।
छत्तीसगढ़ी परंपरा म ए गीत के महत्व
छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई म भजन अउ जस गीत के अपन अलग पहचान हवय। गांव के धार्मिक आयोजन, मंडली, कीर्तन अउ पारंपरिक कार्यक्रम म भगवान के लीला गाथा ला लोकबोली म गाये के परंपरा रहिस।
“गईया चराये प्रतिपाला” जइसन गीत मन कृष्ण भक्ति अउ लोक संस्कृति ला एक संग जोड़थें। छत्तीसगढ़ी भाषा के सरलता के कारण भगवान कृष्ण के कथा गांव के आम मनखे तक सहज रूप ले पहुंचथे।
गीत के विशेषता अउ महत्व
1.ए गीत म भगवान कृष्ण के बाल लीला के सुंदर चित्रण हवय।
2.गउवा अउ बछड़ा के माध्यम ले कृष्ण के चरवाहा रूप दिखाय गे हवय।
3.गीत के भाषा सरल अउ गांव-गंवई के छत्तीसगढ़ी बोली जइसन हवय।
4.मुखड़ा आसानी ले याद रह जाथे, तेखर से सामूहिक रूप ले गाये म सुग्घर लागथे।
5.भक्ति संग छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा के झलक घलो मिलथे।
6.कृष्ण भक्त मन बर ये गीत भक्ति अउ आनंद के माध्यम बन सकथे।
गायक राकेश तिवारी के परिचय
राकेश तिवारी छत्तीसगढ़ी भक्ति अउ लोकगीत के गायक हवंय। “गईया चराये प्रतिपाला” गीत ला अपन आवाज म प्रस्तुत करके भगवान श्रीकृष्ण के गउवा चराये के लीला ला मधुर ढंग ले प्रस्तुत करे हवंय।
इनकर YouTube चैनल Rakesh Tiwari Jeora म छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत अउ भक्ति से जुड़े सामग्री देखे-सुने बर मिल सकथे।
गीतकार राकेश तिवारी के परिचय
राकेश तिवारी छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के क्षेत्र म अपन रचना अउ गायकी के माध्यम ले जुड़ाय कलाकार हवंय। “गईया चराये प्रतिपाला” गीत म गीत लेखन के संग कृष्ण भक्ति के भाव ला सरल लोकभाषा म प्रस्तुत करे गे हवय।
इनकर रचना म छत्तीसगढ़ी बोली के सहज शब्द, भक्ति भाव अउ लोक जीवन के झलक देखे बर मिलथे।
गीत के कथा — छत्तीसगढ़ी में
गोकुल के धरती म जब भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप म अपन सखा मन संग खेलत रहिन, तऊन समय के अनेक लीला मन भक्त मन के मन ला आज घलो मोहित करथे। कृष्ण के बाल लीला म गउवा चराये के प्रसंग सबसे सुंदर अउ मनभावन प्रसंग माने जाथे।
कन्हैया ला गउवा ले बहुत मया रहिस। गोकुल के गउवा मन जब जंगल के डहर जावत रहिन, तब नन्हा कृष्ण घलो अपन सखा मन संग उहां पहुंच जावत रहिन। हाथ म बंशी, संग म ग्वाल-बाल अउ चारों डहर चरइया गउवा—ए दृश्य बहुत सुग्घर लागय।
“गईया चराये प्रतिपाला” गीत म एही कृष्ण लीला के भाव ला छत्तीसगढ़ी लोकबोली म गाये गे हवय। गीत म मईया ले पूछे जाथे कि गईया कोन रंग के हवंय, बछड़ा कोन रंग के हवंय अउ चरवाहा कोन आय। ए सवाल के माध्यम ले गीत धीरे-धीरे कृष्ण के रूप ला सामने लाथे।
गीत के अंतरा म अलग-अलग बन के उल्लेख आथे। गउवा अउ बछड़ा बन म चरथें अउ उंकर रखवाली करे वाला चरवाहा कोनो अउ नइ, बल्कि अपन किशन कन्हैया आय। कृष्ण अपन बंशी के मधुर धुन बजावत गउवा मन ला चरावत हवंय—ए कल्पना भक्त के मन म एक सुंदर आध्यात्मिक चित्र बना देथे।
कृष्ण के गउवा चराये के लीला सिरिफ एक कथा नइ, बल्कि भक्ति म सरलता अउ अपनापन के प्रतीक घलो आय। भगवान खुद चरवाहा के रूप धरके अपन भक्त अउ जीव-जंतु मन संग जुड़ जाथें। एही कारण कृष्ण ला गोपाल, गोविंद जइसन नाम ले घलो पुकारे जाथे।
छत्तीसगढ़ी लोकभाषा म ए कथा के गीत रूप म प्रस्तुति खास महत्व रखथे। जब भक्ति के बात अपन गांव के बोली म सुनई देथे, त मनखे मन ला अपनपन महसूस होथे। गीत के सरल शब्द, दोहराव वाला मुखड़ा अउ कृष्ण के मनमोहक रूप एला मंडली म गाये बर उपयुक्त बनाथे।
“गईया चराये प्रतिपाला” गीत म गउवा, बछड़ा, बन, बंशी अउ किशन कन्हैया—ए सबके माध्यम ले भगवान के सुंदर बाल रूप के स्मरण करे गे हवय। ए गीत ला सुनत समय भक्त के मन म कृष्ण के गोकुल लीला के कल्पना जागथे अउ भक्ति के भाव गहिरा होथे।
— अक्सर पूछे जाथे वाले सवाल —
1. “गईया चराये प्रतिपाला” गीत के गायक कोन हें?
ए गीत के गायक राकेश तिवारी हवंय।
2. ए गीत के गीतकार कोन हें?
ए गीत के गीतकार राकेश तिवारी हें।
3. “गईया चराये प्रतिपाला” कोन किसम के गीत आय?
ये एक छत्तीसगढ़ी कृष्ण भक्ति गीत आय।
4. गीत म कोन भगवान के लीला के वर्णन हवय?
गीत म भगवान श्रीकृष्ण के गउवा चराये के लीला के वर्णन हवय।
5. गीत के YouTube चैनल के नाम का आय?
गीत के YouTube चैनल के नाम Rakesh Tiwari Jeora आय।
6. गीत म किशन कन्हैया ला कइसन रूप म देखाय गे हवय?
गीत म किशन कन्हैया ला गउवा चरइया चरवाहा के रूप म प्रस्तुत करे गे हवय।
7. ए गीत के मुख्य विषय का आय?
ए गीत के मुख्य विषय कृष्ण भक्ति, गउवा अउ कृष्ण के बाल लीला आय।
8. ए गीत ला कहां गाये जा सकथे?
ए गीत ला भजन, कृष्ण भक्ति कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन अउ जस मंडली म गाये जा सकथे।
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