ये जुड़वास आगे ना | मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना | नया छत्तीसगढ़ी शीतला माता जस गीत Lyrics

✦✦ जुड़वास आगे ना ✦✦


JUDWAS AAGE NA | जुड़वास आगे ना | Master  Sunil Sihore.jpg
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गीत - जुड़वास आगे ना 

गीत लेबल - जुड़वास 

 गायक -सुनील सिहोरे 

गीतकार -मंगल वर्मा 

यूट्यूब - मास्टर सुनील सिहोरे  

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे

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गीत के बारे में 

"ये जुड़वास आगे ना" छत्तीसगढ़ी संस्कृति और शीतला माता की अटूट भक्ति से जुड़ा अत्यंत सुंदर जस गीत है। इस गीत में आषाढ़ मास में मनाए जाने वाले जुड़वास पर्व की महिमा का वर्णन किया गया है। गीत बताता है कि जब जुड़वास आता है तब पूरी प्रकृति हरियाली से भर जाती है और देवी-देवता भी माता शीतला की आराधना करते हैं। भक्त माता के दरबार में चना, दार, कच्ची हल्दी और श्रृंगार अर्पित कर सुख-समृद्धि तथा रोगमुक्त जीवन की कामना करते हैं। यह गीत श्रद्धा, आस्था और छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का सुंदर परिचय देता है।

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मुखड़ा 

 ये जुड़वास आगे ना , ये

जुड़वास आगे ना 

मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना -2 

उड़ान - ये अषाढ़ आगे ना -2 ,

मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना

अंतरा -1 

पावन महीना आषाढ़ होथे जग भुईया हरियाये 

सरग लोक ले देवी देवता सब तोर गन ला गाये 

नाग लोक अउ लोक लोक सुतन ले हवय सबो जुरयाये 

लछमी नारायण ब्रम्हा इस्वर सब तोर सेवा बजाये 

उड़ान - मनभावन लागे -----सबके मन ल भागे ना 

मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना

अंतरा -2 

नारद वीणा बजाके रिझाये सुमरे तोला शिवशंकर 

इक्कीस बहिनी संग में  दर्शन देथस दे तैहर 

उमर घूमर के सेवा बजाये जुरमिल सगरो देवन हर 

हमधुप अगियारी जराके जपे तोर नाव के मंतर 

उड़ान -तनमन उजरागे ना  -----सब दुःख ला भुलागे ना  

मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना

अंतरा -3  

शीतला शक्ति सतरूपा तैहर राखे मया बढ़ाके 

तोर जुड़वास मनाये सब्बो झन तोर देवाला में आके 

चना दार कच्चा हरदी संग सबो सिंगार चढ़ाके 

सबला शीतल करथस मईया अजय आशीष बगराके 

उड़ान -फूटे भाग हा  जागे ना -----मंगल सुख पागे ना 

मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना

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गीत का अर्थ

इस गीत में शीतला माता के जुड़वास पर्व की महिमा का वर्णन किया गया है। आषाढ़ का महीना आते ही धरती हरियाली से भर जाती है और चारों ओर आनंद का वातावरण बन जाता है। देवी-देवता भी माता शीतला की स्तुति करते हैं।

गीत में बताया गया है कि नारद मुनि वीणा बजाकर माता की आराधना करते हैं, भगवान शिव माता का स्मरण करते हैं और इक्कीस बहनों सहित माता भक्तों को दर्शन देती हैं।

भक्त माता के चरणों में चना, दार, कच्ची हल्दी और श्रृंगार अर्पित करते हैं। माता अपने भक्तों के जीवन को शीतलता, सुख, समृद्धि और मंगल से भर देती हैं। यह गीत श्रद्धा, सेवा, भक्ति और लोक परंपरा का सुंदर संदेश देता है।

गीत की विशेषता

  • जुड़वास पर्व की धार्मिक महिमा का सुंदर वर्णन।
  • शीतला माता की असीम कृपा का भावपूर्ण चित्रण।
  • छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की झलक।
  • सरल एवं मधुर भाषा।
  • भक्ति और लोक संगीत का अद्भुत संगम।
  • आषाढ़ माह के महत्व को दर्शाता है।
  • जस गायन मंडलियों के लिए अत्यंत लोकप्रिय।
  • शीतला माता की पूजा में गाया जाने वाला भक्तिमय गीत।

📖 कथा

आषाढ़ मास का समय था। चारों ओर वर्षा की फुहारों से धरती हरियाली की चादर ओढ़ चुकी थी। गाँव के लोग बड़े उत्साह से जुड़वास पर्व की तैयारी कर रहे थे। हर घर में माता शीतला की पूजा की सामग्री सजाई जा रही थी। मंदिर में चना, दार, कच्ची हल्दी, नारियल और फूल चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही थी।

सुबह होते ही जस गायन मंडली ने माता का गुणगान शुरू किया—"ये जुड़वास आगे ना..."। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

मान्यता है कि इस दिन माता शीतला स्वयं अपने भक्तों के घर-आँगन में पधारती हैं और रोग-दोष, दुख और कष्ट दूर करती हैं। भक्त सच्चे मन से पूजा करते हैं तो उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

नारद मुनि वीणा बजाकर माता का गुणगान करते हैं, भगवान शिव उनका स्मरण करते हैं और सभी देवी-देवता माता की महिमा गाते हैं। भक्त अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करते हैं।

जुड़वास केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, सेवा, श्रद्धा और लोक संस्कृति का पावन उत्सव है। यही संदेश यह गीत बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है।


🔗 (CG Jas Lyrics)

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  1. 👉 तोर आरती उतारन
  2. 👉 तोर जस महिमा
  3. 👉 जब हर-हर बोला
  4. 👉 दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा मा
  5. 👉 जब नव दुर्गा के हा
  6. 👉 कर लव सेवा गा
  7. 👉 जगमग जोत जले
  8. 👉 तुम झूलव महामाई
  9. 👉 मयारू दाई

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