ये जुड़वास आगे ना | मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना | नया छत्तीसगढ़ी शीतला माता जस गीत Lyrics
गीत - जुड़वास आगे ना
गीत लेबल - जुड़वास
गायक -सुनील सिहोरे
गीतकार -मंगल वर्मा
यूट्यूब - मास्टर सुनील सिहोरे
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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गीत के बारे में
"ये जुड़वास आगे ना" छत्तीसगढ़ी संस्कृति और शीतला माता की अटूट भक्ति से जुड़ा अत्यंत सुंदर जस गीत है। इस गीत में आषाढ़ मास में मनाए जाने वाले जुड़वास पर्व की महिमा का वर्णन किया गया है। गीत बताता है कि जब जुड़वास आता है तब पूरी प्रकृति हरियाली से भर जाती है और देवी-देवता भी माता शीतला की आराधना करते हैं। भक्त माता के दरबार में चना, दार, कच्ची हल्दी और श्रृंगार अर्पित कर सुख-समृद्धि तथा रोगमुक्त जीवन की कामना करते हैं। यह गीत श्रद्धा, आस्था और छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का सुंदर परिचय देता है।
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मुखड़ा
जुड़वास आगे नामोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना -2
उड़ान - ये अषाढ़ आगे ना -2 ,
मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना
अंतरा -1
पावन महीना आषाढ़ होथे जग भुईया हरियाये
सरग लोक ले देवी देवता सब तोर गन ला गाये
नाग लोक अउ लोक लोक सुतन ले हवय सबो जुरयाये
लछमी नारायण ब्रम्हा इस्वर सब तोर सेवा बजाये
उड़ान - मनभावन लागे -----सबके मन ल भागे ना
मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना
अंतरा -2
नारद वीणा बजाके रिझाये सुमरे तोला शिवशंकर
इक्कीस बहिनी संग में दर्शन देथस दे तैहर
उमर घूमर के सेवा बजाये जुरमिल सगरो देवन हर
हमधुप अगियारी जराके जपे तोर नाव के मंतर
उड़ान -तनमन उजरागे ना -----सब दुःख ला भुलागे ना
मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना
अंतरा -3
शीतला शक्ति सतरूपा तैहर राखे मया बढ़ाके
तोर जुड़वास मनाये सब्बो झन तोर देवाला में आके
चना दार कच्चा हरदी संग सबो सिंगार चढ़ाके
सबला शीतल करथस मईया अजय आशीष बगराके
उड़ान -फूटे भाग हा जागे ना -----मंगल सुख पागे ना
मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना
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गीत का अर्थ
इस गीत में शीतला माता के जुड़वास पर्व की महिमा का वर्णन किया गया है। आषाढ़ का महीना आते ही धरती हरियाली से भर जाती है और चारों ओर आनंद का वातावरण बन जाता है। देवी-देवता भी माता शीतला की स्तुति करते हैं।
गीत में बताया गया है कि नारद मुनि वीणा बजाकर माता की आराधना करते हैं, भगवान शिव माता का स्मरण करते हैं और इक्कीस बहनों सहित माता भक्तों को दर्शन देती हैं।
भक्त माता के चरणों में चना, दार, कच्ची हल्दी और श्रृंगार अर्पित करते हैं। माता अपने भक्तों के जीवन को शीतलता, सुख, समृद्धि और मंगल से भर देती हैं। यह गीत श्रद्धा, सेवा, भक्ति और लोक परंपरा का सुंदर संदेश देता है।



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