गउधन ल लक्ष्मी जान | छत्तीसगढ़ी जस गीत | गऊ माता के महत्व अउ पीरा के मार्मिक कहानी

✦✦ गउधन ल लक्ष्मी जान | छत्तीसगढ़ी जस गीत |  ✦✦

गीत -गउधन लक्ष्मी जान 

गायक -कांतिकार्तिक यादव 

गीतकार  -मिनेश कुमार साहू 

संगीत  -ओपी देवांगन 

म्यूजिक लेबल -ओपी देवांगन 

वेबसाइट   -www . cgjaslyrics .com

वेबसाइट owner -कैलाश  पंचारे 

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मुखड़ा 

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

उड़ान -गउ म देवता तैतीस कोटि झन कीजर तै ऐति ओती 

गउ म देवता तैतीस कोटि झन कीजर तै ऐति ओती 

छहुअ त हे परमान का भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

अंतरा-1

घर ले खेदव लक्ष्मी दाई ला कोठा ल उजारत हव 

खेती खार के पैरा भूसा म काबर आगि बारत हव 

कोन बैरी के भुध म आके एला काबर टारत हव 

भूख म रोवय अउ नरियावय आँखि नई तो उघारत हव 

उड़ान -जेकर बिना घर हे सुन्ना कोठी डोली उन्ना उन्ना 

जेकर बिना घर हे सुन्ना कोठी डोली उन्ना उन्ना 

बिन गोबर के धान गा  भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

अंतरा -2

कतको मोटर गाड़ी ले घलो रद्दा म रउड़ावत हे 

खोजत हे चारा ल बपरी झिल्ली ओल्हा ल खावत हे 

कोन जनम के पाप मिले हे लाठी टांगिया ल पावत हे 

उड़ान -मुड़ ल धरके बईठे पहटिया गुणय संझा अउ बिहनिया 

मुड़ ल धरके बईठे पहटिया गुणय संझा अउ बिहनिया 

 गोरथ हे दैहान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

अंतरा -3

रोअत कलपत आज किजेरथे रद्दा दुआरी डगर म जी 

बाचे परिया ल कब आलस धरती बूड़गे जहर म जी 

दूध दही ह ठार सुखागे दुहना रोवय घर म जी 

बढ़ बिपत म पड़बे तैहा रोबे आठो पहर म जी

उड़ान -गऊ पीड़ा नई दिखय काबर बुढ़िया बड़गे तोरे जागर 

अब तो बन जा सुजान गा भैया  गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

अंतरा -4

चेतव  चेतावव जम्मो जुरमिल  गउ ल कोठा बाधव जी 

 खेती खार बर गोबर खातु बइला म नागर फादव जी 

दूध दही ले जीव जुड़ाही छेना म जेवन राधव जी 

चलव लहुटव जुन्ना गांव म भईया उधव माधव जी  

उड़ान -माई परब हे हरेली दिवाली गऊ बर लोदी थारी थारी 

माई परब हे हरेली दिवाली कांतिकार्तिक करे सिंगारी 

सुहई संग आशीष पान गा भईया   गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान

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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

ये जस गीत म गऊ माता ल लक्ष्मी के रूप म माने गे हवय। गाना म बताय गे हवय कि गऊ के बिना घर, खेती, जीवन सब अधूरा हवय।

पहिली भाग म कहिथे कि गऊ म तैतीस कोटि देवता बसथें, फेर आज लोगन मन गऊ के सम्मान नई करत हें।

दूसर भाग म गऊ के दुख-दर्द दिखाय गे हवय—रद्दा म भटकत, भूख म तड़पत अउ मार खावत।

तीसर भाग म गऊ के हालत अउ खराब होवत दिखाय गे हवय, जिहां दूध-दही सब खतम होगे अउ जीवन संकट म आ गे।

आखिरी भाग म संदेश हवय कि

👉 फेर ले गऊ सेवा अपनावव

👉 खेती म गोबर के उपयोग करव

👉 गांव के पुरखा परंपरा ल वापस लावव

🟢 गीत के महत्व (महत्व)

गऊ माता ल धन अउ लक्ष्मी के प्रतीक मानाय जाथे

खेती-किसानी के आधार हवय गऊ

गोबर अउ गोमूत्र प्राकृतिक खेती म जरूरी हवय

ये गीत समाज ल गऊ संरक्षण के संदेश देथे

आज के समय म पर्यावरण अउ जैविक खेती बर बहुत जरूरी

👉 ये गीत समाज ल जागरूक करे के एक मजबूत माध्यम हवय।

🔵 छोटा कहानी

ये कहानी एक ऐसे गांव के हवय जिहां पहले हर घर म गऊ रहिस। गऊ के सेवा होवत रहिस, खेत हरियाली ले भर जाथे।

फेर धीरे-धीरे लोगन मन गऊ ल छोड़ के शहर के जीवन अपनाय लगिन।

गऊ रद्दा म भटकत, भूख म रोवत दिखे लागिस।

तब गांव के बुजुर्ग मन समझाइन—

👉 “गऊ बिना जीवन अधूरा हवय”

अंत म गांव वाले फेर ले गऊ सेवा शुरू करथें अउ सुख-समृद्धि लौट आथे।


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