गउधन ल लक्ष्मी जान | छत्तीसगढ़ी जस गीत | गऊ माता के महत्व अउ पीरा के मार्मिक कहानी
गीत -गउधन लक्ष्मी जान
गायक -कांतिकार्तिक यादव
गीतकार -मिनेश कुमार साहू
संगीत -ओपी देवांगन
म्यूजिक लेबल -ओपी देवांगन
वेबसाइट -www . cgjaslyrics .com
वेबसाइट owner -कैलाश पंचारे
मुखड़ा
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
उड़ान -गउ म देवता तैतीस कोटि झन कीजर तै ऐति ओती
गउ म देवता तैतीस कोटि झन कीजर तै ऐति ओती
छहुअ त हे परमान का भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
अंतरा-1
घर ले खेदव लक्ष्मी दाई ला कोठा ल उजारत हव
खेती खार के पैरा भूसा म काबर आगि बारत हव
कोन बैरी के भुध म आके एला काबर टारत हव
भूख म रोवय अउ नरियावय आँखि नई तो उघारत हव
उड़ान -जेकर बिना घर हे सुन्ना कोठी डोली उन्ना उन्ना
जेकर बिना घर हे सुन्ना कोठी डोली उन्ना उन्ना
बिन गोबर के धान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
अंतरा -2
कतको मोटर गाड़ी ले घलो रद्दा म रउड़ावत हे
खोजत हे चारा ल बपरी झिल्ली ओल्हा ल खावत हे
कोन जनम के पाप मिले हे लाठी टांगिया ल पावत हे
उड़ान -मुड़ ल धरके बईठे पहटिया गुणय संझा अउ बिहनिया
मुड़ ल धरके बईठे पहटिया गुणय संझा अउ बिहनिया
गोरथ हे दैहान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
अंतरा -3
रोअत कलपत आज किजेरथे रद्दा दुआरी डगर म जी
बाचे परिया ल कब आलस धरती बूड़गे जहर म जी
दूध दही ह ठार सुखागे दुहना रोवय घर म जी
बढ़ बिपत म पड़बे तैहा रोबे आठो पहर म जी
उड़ान -गऊ पीड़ा नई दिखय काबर बुढ़िया बड़गे तोरे जागर
अब तो बन जा सुजान गा भैया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
अंतरा -4
चेतव चेतावव जम्मो जुरमिल गउ ल कोठा बाधव जी
खेती खार बर गोबर खातु बइला म नागर फादव जी
दूध दही ले जीव जुड़ाही छेना म जेवन राधव जी
चलव लहुटव जुन्ना गांव म भईया उधव माधव जी
उड़ान -माई परब हे हरेली दिवाली गऊ बर लोदी थारी थारी
माई परब हे हरेली दिवाली कांतिकार्तिक करे सिंगारी
सुहई संग आशीष पान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
गउधन ल लक्ष्मी जान गा भईया गउधन लक्ष्मी जान
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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)
ये जस गीत म गऊ माता ल लक्ष्मी के रूप म माने गे हवय। गाना म बताय गे हवय कि गऊ के बिना घर, खेती, जीवन सब अधूरा हवय।
पहिली भाग म कहिथे कि गऊ म तैतीस कोटि देवता बसथें, फेर आज लोगन मन गऊ के सम्मान नई करत हें।
दूसर भाग म गऊ के दुख-दर्द दिखाय गे हवय—रद्दा म भटकत, भूख म तड़पत अउ मार खावत।
तीसर भाग म गऊ के हालत अउ खराब होवत दिखाय गे हवय, जिहां दूध-दही सब खतम होगे अउ जीवन संकट म आ गे।
आखिरी भाग म संदेश हवय कि
👉 फेर ले गऊ सेवा अपनावव
👉 खेती म गोबर के उपयोग करव
👉 गांव के पुरखा परंपरा ल वापस लावव
🟢 गीत के महत्व (महत्व)
गऊ माता ल धन अउ लक्ष्मी के प्रतीक मानाय जाथे
खेती-किसानी के आधार हवय गऊ
गोबर अउ गोमूत्र प्राकृतिक खेती म जरूरी हवय
ये गीत समाज ल गऊ संरक्षण के संदेश देथे
आज के समय म पर्यावरण अउ जैविक खेती बर बहुत जरूरी
👉 ये गीत समाज ल जागरूक करे के एक मजबूत माध्यम हवय।
🔵 छोटा कहानी
ये कहानी एक ऐसे गांव के हवय जिहां पहले हर घर म गऊ रहिस। गऊ के सेवा होवत रहिस, खेत हरियाली ले भर जाथे।
फेर धीरे-धीरे लोगन मन गऊ ल छोड़ के शहर के जीवन अपनाय लगिन।
गऊ रद्दा म भटकत, भूख म रोवत दिखे लागिस।
तब गांव के बुजुर्ग मन समझाइन—
👉 “गऊ बिना जीवन अधूरा हवय”
अंत म गांव वाले फेर ले गऊ सेवा शुरू करथें अउ सुख-समृद्धि लौट आथे।
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