ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा | राकेश तिवारी /छत्तीसगढ़ी जस गीत | CG Jas Lyrics

ये भंग भंग भंग मोर बाहरा खार मा 

ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा छत्तीसगढ़ी जस गीत

गीत के बोल

"ये भंग भंग भंग मोर बाहरा खार मा” एक रहस्यमय अउ पारंपरिक रंग वाले छत्तीसगढ़ी जस गीत के रूप म प्रस्तुत करे गे हे। गीत म गांव-गंवई के लोकविश्वास, बाहरा-खार, भंग के प्रतीक, डरावना वातावरण अउ लोकभाषा के सुंदर मेल दिखाई देथे।

गीत के बोल म रात के सुनसान माहौल, भटकटिया, परेतिन, मशान अउ रहस्यमय लोक-कल्पना के चित्रण करे गे हे। ए गीत के भाषा सरल, ग्रामीण अउ लोकगीत के भाव ले जुड़ाय रखे गे हे।

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गीत -भंग भंग भंग हां 

गायक -राकेश तिवारी 

गीतकार -राकेश तिवारी 

यूट्यूब -राकेश तिवारी jeora 

वेबसाइट ऑनर - के के पंचारे 

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मुखड़ा 

 ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा 

बरय टोनही भंग भंग भंग हां 

मोर बाहरा खार मा 

बरय टोनही भंग भंग भंग हां 

अंतरा -1 

भटकटिया के जरी ला चाटय लाल भंगा भंग बरय 

मुँह तोरे विकराल दिखय देखत जियरा डरय -2

उड़ान -बिन मुड़ी के तै संग में चढ़े भंग भंग भंग हां 

मोर बाहरा खार मा बरय टोनही भंग भंग भंग हां  

अंतरा -2  

घुघवा बनके बइठे परेतिन सुते मनखे ल ताकत 

मनखे के मुँह म सुध ओरमाके सपसप लहू ला चुहकत 

उड़ान -अढाहिया खड़ी तोर मंतर हावय भंग भंग भंग हां

मोर बाहरा खार मा बरय टोनही भंग भंग भंग हां  

अंतरा -3 

चटिया मटिया मरी मशान आये तोर संगवारी 

लुगरा हेरके चुंदी छरियाके निकलत भूख पियारी 

उड़ान - अरे ये टोनही ले मोला बचाले भंग भंग भंग हां

मोर बाहरा खार मा बरय टोनही भंग भंग भंग हां

गीत के अर्थ

ए गीत म एक डरावना अउ रहस्यमय लोक-दृश्य के वर्णन करे गे हे। गीत के गायक अपन आसपास के बाहरा-खार के वातावरण म दिखाई देय रहस्यमय चीज मन के कल्पनात्मक वर्णन करथे।

“भंग भंग” के दोहराव गीत म रहस्य अउ डर के भाव ला अउ गहरा करथे। भटकटिया, परेतिन, मशान अउ सुनसान जगह के उल्लेख ले एक लोक-कथा जइसन वातावरण बनथे।

गीत के अंतिम हिस्सा म गायक डर के भाव ले “ये टोनही ले मोला बचाले” कहिथे। ए भाव गीत ला लोकविश्वास अउ ग्रामीण जीवन के कल्पनाशील पक्ष ले जोड़थे।  

गीत के विशेषता

1.गीत के भाषा म ठेठ छत्तीसगढ़ी लोकबोली के स्वाद मिलथे।
2.गीत म रहस्य अउ रोमांच के भाव मजबूत हे।
3.“भंग भंग भंग हां” के दोहराव गीत के मुख्य पहचान बनथे।
4.बाहरा-खार अउ गांव के लोक वातावरण के चित्रण करे गे हे।
5.गीत के अंतरा म अलग-अलग रहस्यमय दृश्य के कल्पना करे गे हे।
6.गीत म लोकविश्वास अउ पारंपरिक कल्पना के प्रभाव दिखाई देथे।
7.छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति के ग्रामीण शब्दावली के उपयोग करे गे हे।

गायक के जीवनी – राकेश तिवारी

राकेश तिवारी छत्तीसगढ़ी संगीत के क्षेत्र म अपन आवाज अउ गीत रचना के माध्यम ले योगदान देथें। उनकर प्रस्तुति म छत्तीसगढ़ी बोली के सहजपन अउ लोकगीत के भाव ला महत्व मिले हे।

उनकर यूट्यूब चैनल “राकेश तिवारी जेओरा” के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के सामग्री श्रोता मन तक पहुंचत हे।

“ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा” गीत म रहस्य अउ लोकभावना ला आवाज के माध्यम ले प्रस्तुत करे गे हे।

गीतकार के जीवनी – राकेश तिवारी

राकेश तिवारी छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के क्षेत्र ले जुड़े गीतकार अउ गायक के रूप म अपन रचना प्रस्तुत करथें। उनकर गीत म छत्तीसगढ़ी बोली, गांव के वातावरण, लोकजीवन अउ पारंपरिक भाव के झलक दिखाई देथे।

उनकर रचनात्मक शैली म सरल छत्तीसगढ़ी शब्द के उपयोग देखे बर मिलथे, जेन ह गांव-गंवई के श्रोता मन ला आसानी ले समझ म आथे। “ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा” जइसन गीत म लोककल्पना, रहस्य अउ ग्रामीण परिवेश के मेल दिखाई देथे।

राकेश तिवारी के गीत मन म छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के संरक्षण अउ लोकसंगीत के भाव ला आगे बढ़ाय के प्रयास दिखाई देथे।


गीत के कथा – छत्तीसगढ़ी भाषा मा 

बाहरा-खार के रहस्यमय रात

गांव के बाहरी इलाका ला छत्तीसगढ़ी म अक्सर बाहरा-खार कहे जाथे। दिन म जिहां खेत-खार, पेड़-पौधा अउ खुला मैदान दिखाई देथे, उही जगह रात म एकदम अलग माहौल बना देथे। चारों डहर सन्नाटा, दूर ले आवत झींगुर के आवाज अउ हवा के सरसराहट मन म एक अलग किसिम के रहस्य पैदा कर देथे।

ए गीत के कल्पना भी अइसने एक रहस्यमय बाहरा-खार के माहौल ले शुरू होथे। गीत म “भंग भंग भंग” के आवाज बार-बार सुनाई देथे। ए आवाज मानो सुनसान रात के बीच कोनो अनजान उपस्थिति के संकेत देत होय।

गीत के पहिली कड़ी म भटकटिया के जरी, लाल भंग अउ विकराल चेहरा के कल्पना करे गे हे। ए दृश्य ला देखके मनखे के जियरा डर जाय के भाव गीत म दिखाई देथे। आगे गीत म बिन मुड़ी के रहस्यमय आकृति के कल्पना करे गे हे, जेन लोककथा के डरावना पात्र जइसन महसूस होथे।

दूसर कड़ी म रात के अंधियार म घुघवा बने बइठे परेतिन के कल्पना करे गे हे। उ अपन आसपास सुते मनखे मन ला ताकत हे। ए हिस्सा म लोककथा के रहस्यमय वातावरण अउ गहरा हो जाथे।

तीसर कड़ी म मशान, चटिया-मटिया अउ डरावना वातावरण के कल्पना करे गे हे। गीत के पात्र मन मानो रात के अंधियार म अपन संगवारी मन संग बाहरा-खार म घूमत होथें। ए सब दृश्य मन गीत ला एक लोक-रहस्य कथा के रूप दे देथे।

अंत म गीत के गायक डर के भाव म भगवान या अपन रक्षक ला पुकारत कहिथे—“अरे ये टोनही ले मोला बचाले।” ए पुकार गीत के भाव ला चरम म ले जाथे।

पूरा गीत ला देखे जावय त ए एक लोककल्पना आधारित रहस्यमय रचना जइसन हे। एमा छत्तीसगढ़ के गांव, बाहरा-खार, लोकबोली अउ पुराना लोकविश्वास के छाप दिखाई देथे। गीत के उद्देश्य डर पैदा करना मात्र नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोकगीत के एक अलग रंग ला प्रस्तुत करना भी हे।

 CG Jas Lyrics के 10 मधुर गाना के बोल 

  1. मेघवा भईया – पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत
  2. गुरु बिना जग विरथा हे – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  3. तोर रूप बिकट बिकराला वो – जय मरघट के काली
  4. पैजनिया बाजे – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  5. लहराए जंवारा -जंवारा विसर्जन गीत 
  6. तोर दया ले माँ अम्बे – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  7. मोर चले माँ दुर्गा – जस गीत
  8. जब काली चरण जग हां -पचरा जस 
  9. देवी दुर्गा मईया -विसर्जन गीत 
  10. माटी के पुत्री अम्बा 

CG Jas Lyrics

CG Jas Lyrics म छत्तीसगढ़ी जस गीत, भजन, आरती अउ लोकगीत के बोल ला व्यवस्थित रूप म प्रस्तुत करे जाथे। हमर उद्देश्य छत्तीसगढ़ी लोकभाषा अउ लोकसंगीत से जुड़े गीत मन ला डिजिटल माध्यम ले पाठक मन तक पहुंचाना अउ सुरक्षित रखना हे।


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