सावन के महीना ये ना पावन ये महीना ना – चलव चलव भोला के दरबार में | छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स | CG Jas Lyrics

सावन के महीना ये ना पावन ये महीना ना – चलव चलव भोला के दरबार में | छत्तीसगढ़ी शिव जस गीत

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गीत-सावन के महीना

गायक-कामता प्रसाद सेन

गीतकार -कामता प्रसाद सेन 

म्यूज़िक लेबल- सावन स्पेशल

 यूट्यूब - छ. ग. सेन भगत 

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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गीत के बारे में

"सावन के महीना ये ना पावन ये महीना ना" भगवान शिव के महिमा ल गावत एक सुंदर छत्तीसगढ़ी भक्ति जस गीत आय। ए गीत मं सावन महीना के पवित्रता, कांवड़ यात्रा, बोलबम के जयघोष अऊ भोलेनाथ के कृपा के सुंदर वर्णन मिलथे। गीत मं भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप, राम भक्ति, अवघड़दानी रूप अऊ भक्त मन ऊपर बरसत कृपा ल भावपूर्ण ढंग ले बताय गे हे। सावन महीना मं ए गीत सुने अऊ गाए ले भक्तिमय वातावरण बन जाथे अऊ शिव भक्ति के भावना अउ मजबूत हो जाथे।

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मुखड़ा 

सावन के महीना ये ना पावन ये महीना ना,चलव चलव भोला के दरबार में 

उड़ान - चलव चलव भोला के दरबार में चलव चलव भोला के दरबार में 

सावन के महीना ये ना पावन ये महीना ना,चलव चलव भोला के दरबार में 

अंतरा -1 

दुनिया ला बचाये खातिर पिये जहर के प्याला पिये जहर के प्याला -2

 राम नाम के सुमिरन करके मगन हे डमरू वाला-ं-2

रामे के दीवाना ये ना, पावन ये महीना ना

चलव चलव भोला के दरबार में

 अंतरा-2

रिमझिम बरसे सावन बिंदियां करिया घटा हर छांगे -2

जंगल झाड़ी शिव के दुवारी सरग बरोबर लागे -2

गला में नगीना ये ना, पावन ये महीना ये ना 

चलव चलव भोला के दरबार में

अंतरा -3

बोलबम बोलबम बोलत निकलव चलव गा कावर धरके 

अवघड़ दानी शंकर भोला सबके झोली भरधे

जेन भक्ति करते ना, पावन ये महीना ये ना

चलव चलव भोला के दरबार में

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गीत के अर्थ

ए गीत मं सावन महीना के धार्मिक महत्व ल सुंदर ढंग ले बताय गे हे। भगवान शिव के समुद्र मंथन के समय विषपान करके संसार के रक्षा करे के प्रसंग, राम नाम के प्रति ओखर श्रद्धा, अऊ सावन मं कांवड़ यात्रा के महत्व ल गीत मं गुनगान करे गे हे। गीत भक्त मन ला शिव दरबार पहुंचके सच्चा मन ले पूजा अऊ भक्ति करे बर प्रेरित करथे।

गीत की विशेषता

1.सावन महीना विशेष शिव भक्ति गीत।

2.सरल अऊ मधुर छत्तीसगढ़ी भाषा।

3.भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप के वर्णन।

4.बोलबम अऊ कांवड़ यात्रा के सुंदर चित्रण।

5.मंच, भजन संध्या, शिव मंदिर अऊ सावन कार्यक्रम बर उपयुक्त।

6.समूह गायन मं गाए बर आसान।

7.भक्त मन मं शिव भक्ति के भावना जगाथे।

सावन महीना अऊ भगवान शिव के महिमा – कथा 

सनातन धर्म मं सावन महीना ल भगवान शिव के सबसे प्रिय महीना माने जाथे। ए महीना के हर दिन शिव भक्ति, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत, पूजा अऊ "बोल बम" के जयघोष ले पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाथे। छत्तीसगढ़ सहित पूरा भारत मं लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन करे बर मंदिर जाथें अऊ अपन मनोकामना पूरा होय के प्रार्थना करथें।

पौराणिक कथा अनुसार, एक समय देवता अऊ असुर मन अमृत प्राप्त करे बर समुद्र मंथन करे के निर्णय लिन। मंदराचल पर्वत ल मथानी अऊ वासुकी नाग ल रस्सी बनाके समुद्र मंथन सुरू होइस। मंथन के दौरान अनेक दिव्य रत्न निकरिन, फेर सबसे पहिली "हलाहल विष" निकरिस। ए विष इतना भयंकर रहिस कि ओकर प्रभाव ले तीनों लोक मं हाहाकार मच गे। देवता, दानव, मनुष्य, पशु-पक्षी अऊ प्रकृति सब संकट मं पड़ गइन। कोनो घलो ए विष के प्रभाव ल रोक नई सकत रहिस।

जब सब झन संकट मं पड़ गइन, तब देवता मन भगवान शिव के शरण मं पहुंचिन। सबो झन हाथ जोड़के प्रार्थना करिन कि हे महादेव, संसार के रक्षा करे बर अब सिरिफ आपेच सक्षम हवव। भगवान शिव अपन भक्त अऊ संसार के कल्याण बर बिना कोनो स्वार्थ के हलाहल विष ल अपन हथेली मं लेके पी गइन। फेर माता पार्वती जी विष ल शिव जी के कंठ ले नीचे नई जाए दीन। एकर से विष कंठ मं ही रुक गे अऊ भगवान शिव के गला नीला होगे। एही कारण ले भगवान शिव ल नीलकंठ कहे जाथे। ए घटना त्याग, बलिदान अऊ लोककल्याण के सबसे बड़े उदाहरण माने जाथे।

सावन महीना के संबंध मं एक मान्यता ए घलो हे कि समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव के शरीर मं विष के प्रभाव ल शांत करे बर देवता मन जलाभिषेक करिन। तब ले सावन महीना मं शिवलिंग ऊपर जल चढ़ाय के परंपरा सुरू होइस। आज घलो श्रद्धालु गंगा, नर्मदा, महानदी अऊ दूसर पवित्र नदी मन ले जल लाके शिवलिंग मं अर्पित करथें। एला जलाभिषेक कहे जाथे।

सावन मं कांवड़ यात्रा के विशेष महत्व हे। श्रद्धालु मन पवित्र नदी ले जल भरके कांवड़ मं रखथें अऊ पैदल चलके शिव मंदिर पहुंचथें। पूरा रद्दा मं "बोल बम", "हर-हर महादेव" अऊ "जय भोलेनाथ" के जयघोष गूंजत रहिथे। मान्यता हे कि सच्चा मन ले कांवड़ यात्रा करे अऊ भगवान शिव ल जल चढ़ाय ले मनोकामना पूरा होथे अऊ जीवन के दुख-दर्द दूर हो जाथे।

भगवान शिव ल भोलेनाथ अऊ अवघड़दानी घलो कहे जाथे। ओमन बहुत जल्दी अपन भक्त मन ऊपर प्रसन्न हो जाथें। गरीब होय या अमीर, राजा होय या साधारण मनखे, शिव जी सब ल एक समान कृपा देथें। ओमन धन-दौलत नई देखंय, केवल सच्ची श्रद्धा अऊ भक्ति ल स्वीकार करथें। एही कारण ले भगवान शिव सबले सरल अऊ दयालु देवता माने जाथें।

शिव जी के जीवन हमन ला कई महत्वपूर्ण सीख देवथे। ओमन अपन जटा मं मां गंगा ल धारण करके धरती के रक्षा करिन। माथा मं चंद्रमा धारण करके शांति अऊ संतुलन के संदेश दिन। गला मं सर्प धारण करके भय ऊपर विजय के प्रतीक बनिन। शरीर मं भस्म लगाके संसार के नश्वरता के ज्ञान दिन। त्रिशूल ले धर्म, कर्म अऊ ज्ञान के रक्षा के संदेश मिलथे, जबकि डमरू सृष्टि के सृजन अऊ दिव्य नाद के प्रतीक माने जाथे।

सावन महीना मं सोमवार के विशेष महत्व रहिथे। लाखों महिला अऊ पुरुष सोमवार व्रत रखथें। अविवाहित कन्या मन अच्छा जीवनसाथी के कामना करथें, जबकि विवाहित महिला मन अपन परिवार के सुख-समृद्धि अऊ पति के दीर्घायु बर पूजा करथें। ए दिन शिव मंदिर मं बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, दूध, दही, शहद अऊ गंगाजल चढ़ाय जाथे। मान्यता हे कि भगवान शिव ल बेलपत्र सबसे अधिक प्रिय हे।

छत्तीसगढ़ मं सावन के महीना विशेष उत्साह ले मनाय जाथे। गांव-गांव मं शिव मंदिर सजाय जाथे। भजन, जस गीत, कीर्तन अऊ जागरण के आयोजन होथे। भक्त मन रात भर भगवान शिव के महिमा गाथें अऊ पूरा वातावरण भक्तिरस मं डूब जाथे। ए समय गाए जावत छत्तीसगढ़ी जस गीत मन केवल मनोरंजन नई, बल्कि धार्मिक अऊ सांस्कृतिक परंपरा ल घलो मजबूत करथें।

"सावन के महीना ये ना, पावन ये महीना ना, चलव चलव भोला के दरबार में" जइसने गीत एही भावना ल व्यक्त करथे। ए गीत मं भगवान शिव के विषपान, राम नाम के प्रति ओखर प्रेम, सावन के सुंदर प्राकृतिक दृश्य, कांवड़ यात्रा अऊ भोलेनाथ के कृपा के सरल अऊ भावपूर्ण वर्णन मिलथे। गीत भक्त मन ल प्रेरित करथे कि वो मन अपन जीवन मं भक्ति, सेवा, त्याग अऊ सदाचार के मार्ग अपनावं।

सावन के महीना हमन ला प्रकृति के सम्मान, जल संरक्षण, सेवा भावना, संयम अऊ आध्यात्मिक जीवन के महत्व घलो सिखाथे। भगवान शिव के पूजा केवल मंदिर तक सीमित नई होय, बल्कि ओखर संदेश ल अपन व्यवहार मं उतारना ही सच्ची शिव भक्ति आय। जेन मनखे सत्य, करुणा, क्षमा, दया अऊ परोपकार के मार्ग मं चलथे, ओही भगवान शिव के सच्चा भक्त कहाथे।

एखर से सावन महीना केवल एक धार्मिक पर्व नई, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, सेवा अऊ लोककल्याण के संदेश देय वाला पवित्र अवसर आय। भगवान भोलेनाथ अपन सबो भक्त मन ऊपर कृपा बनाय रखंय, सबके जीवन मं सुख, शांति, समृद्धि अऊ उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करंय। हर-हर महादेव! बोल बम!


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