मोला संग देबे माता | Mithleshwar Sen | छत्तीसगढ़ी जस गीत
मोला संग देबे माता – छत्तीसगढ़ी जस गीत | मिथलेश्वरी सेन
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गीत -मोला संग देबे माता
स्वर -मिथलेश्वरी सेन
संगीत -पंडित विवेक शर्मा
यूट्यूब - मिथलेश्वरी सेन
वेबसाइट -cgjaslyrics
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे
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गीत के बारे म कुछ बात
छत्तीसगढ़ महतारी के पावन माटी म माता रानी के भक्ति के अलग-अलग रूप देखे बर मिलथे। इही भक्ति अउ श्रद्धा ले भरे एक सुंदर जस गीत आय – मोला संग देबे माता।
ये गीत म भक्त अपन मन के बात माता ले कहत हे कि हे माता, जब मंय तोर दरबार अउ अलग-अलग देवी-देवता के धाम जाये बर निकलथंव, त मोला अपन संग देबे। छत्तीसगढ़ के पाटनपुर, संबलपुर, धमतरी, डोंगरगढ़, रतनपुर, राजिम, भोरमदेव, चम्पारण, रायपुर, कोरबा, राजनांदगांव अउ अउ दूसर धार्मिक जगह मन के महिमा ला गीत म गाये गे हे।
गीत म माता के अनेक रूप, देवी धाम, बैगा परंपरा अउ शक्ति उपासना के सुंदर झलक मिलथे। ये गीत सुनके भक्त के मन म माता के प्रति श्रद्धा अउ अपन छत्तीसगढ़ के धार्मिक संस्कृति ऊपर गरब जागथे।
मुखड़ा
ये कौरु नगर बर हो, मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
//1 //
जब पाटनपुर के पाट देवता सम्बलपुर समलाई
गढ़ धमतरी के बिलाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ बम्लाई
रतनपुरी महामाया ला सुमरव धमधा के अटल कुंवारी
ये कौरु नगर बर हो, मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
//2//
राजिम मा हे राजिम लोचन जिंहा त्रिवेणी धाम हे
भोरम देव मा महाभोला बिराजे जग मा जेकर नाव हे
चम्पारण मा सहुअत बइठे जग के पालनहारी
तोला बन्दव तोला बन्दव छत्तीसगढ़ महतारी
ये कौरु नगर बर हो, मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
//3//
रायपुर के बंजारी ला नेवतेव,नेवतेव मैं महामाई
कोरबा के मड़वा रानी झलमला के गंगा माई
पताल भैरवी राजनांदगॉव के अउ शीतला महमाई
आरा अउ पारा ला नेवतेव रायगढ़ बूढ़ी माई
ये नेवतेव दुरुग के चंडी ला महासमुंद के खल्लारी ला
जाये बर लागे डर वो मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
//4 //
ये कट कट करके नाचे काली धकधक धरती डोले
झूपत हे झूपा के परेतिन कोनो ला नई छोड़े
ये बैरी के जब पाप बढ़े माँ मया ला वो बगरावे
बांधे धाधे चंदवा बैगा हर मंतर ला फटकारे
ये जादू डगर बर हो मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
ये कौरु नगर बर हो, मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो
गीत के अर्थ
ये गीत के अर्थ बहुत सुंदर अउ भावपूर्ण हे। भक्त माता रानी ले अरजी करत हे कि जब मंय तोर अलग-अलग धाम अउ देवी मंदिर के दर्शन करे बर जावंव, त मोला अपन आशीर्वाद अउ संग देबे।
गीत म छत्तीसगढ़ के अलग-अलग देवी मंदिर अउ धार्मिक स्थान के नाम लेके माता के महिमा बताय गे हे।
पहिली कड़ी म पाटनपुर के पाट देवता, संबलपुर के समलाई, धमतरी के बिलाई, डोंगरगढ़ के बम्लाई, रतनपुर के महामाया अउ धमधा के अटल कुंवारी के सुमिरन करे गे हे।
दूसरी कड़ी म राजिम के राजिम लोचन, भोरमदेव के महादेव अउ चम्पारण के धार्मिक महिमा के वर्णन हे। इहां छत्तीसगढ़ महतारी ला प्रणाम करके अपन माटी के महिमा गाये गे हे।
तीसरी कड़ी म छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिला के देवी मन ला नेवता देके भक्त अपन यात्रा म माता के सहारा मांगथे।
चौथी कड़ी म काली माता के शक्ति, बैगा परंपरा अउ लोकविश्वास के चित्रण करे गे हे। पूरा गीत के मूल भाव आय कि भक्त के जीवन के हर डगर म माता के आशीर्वाद बने रहय।
छत्तीसगढ़ी परंपरा अउ धार्मिक संस्कृति
छत्तीसगढ़ म जस गीत गाये के परंपरा बहुत पुराना हे। गांव-गांव म माता सेवा, जस मंडली अउ भक्ति मंडली मन माता के महिमा गाथें। नवरात्रि, जवारा, जंवारा विसर्जन अउ धार्मिक आयोजन म जस गीत के विशेष महत्व रहिथे।
हमर छत्तीसगढ़ म डोंगरगढ़ के बम्लेश्वरी, रतनपुर के महामाया, दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी अउ अनेक देवी धाम मन के प्रति लोगन के गहिरा श्रद्धा हे।
ये गीत म एके जगह के महिमा नइ, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्र के धार्मिक पहचान ला जोड़े के प्रयास दिखथे।
गीत के माध्यम ले गांव के लोकभक्ति, देवी उपासना अउ अपन माटी के संस्कृति एक संग जुड़ जाथे।
गीत के विशेषता अउ महत्व
1. छत्तीसगढ़ के धार्मिक स्थान के वर्णन: गीत म अलग-अलग देवी धाम के नाव लेके छत्तीसगढ़ के धार्मिक विरासत ला बताय गे हे।
2. माता के संग के अरजी: गीत के मुखड़ा म भक्त माता ले अपन यात्रा म संग देहे के विनती करथे।
3. लोकभक्ति के सुंदर रूप: जस गीत के पारंपरिक अंदाज म माता के महिमा गाये गे हे।
4. छत्तीसगढ़ महतारी के वंदना: गीत म अपन प्रदेश के माटी अउ संस्कृति के प्रति सम्मान झलकथे।
5. शक्ति उपासना: काली माता अउ देवी शक्ति के रूप के वर्णन गीत ला अउ भावपूर्ण बनाथे।
6. धार्मिक एकता: अलग-अलग क्षेत्र के देवी मन के नाम एके गीत म आना, श्रद्धा के एकता ला दर्शाथे।
7. सांस्कृतिक पहचान: ये गीत नवा पीढ़ी ला छत्तीसगढ़ के धार्मिक स्थान अउ लोकपरंपरा के जानकारी देथे।
गायिका – मिथलेश्वरी सेन
मिथलेश्वरी सेन छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत के गायिका के रूप म ये गीत म अपन स्वर देहे हें। मोला संग देबे माता जस गीत म उनकर स्वर के माध्यम ले माता रानी के भक्ति अउ छत्तीसगढ़ के धार्मिक संस्कृति के भाव प्रस्तुत होथे।
ये गीत म माता के अलग-अलग रूप अउ धार्मिक धाम के महिमा गाये गे हे। गायिका के स्वर गीत के भक्ति भाव ला श्रोता मन तक पहुंचाय म महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे।
उनकर जन्मस्थान, संगीत शिक्षा अउ व्यक्तिगत जीवन के प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नइ हे, एखर से बिना पुष्टि के कोनो जानकारी जोड़े नइ गे हे।
गीत के कथा – मोला संग देबे माता
छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव म माता रानी के एक भक्त रहय। वो ह बचपन ले अपन गांव के मंदिर म माता के सेवा करत आइस। जब घलो गांव म जस गीत के आयोजन होवय, तब वो बड़े प्रेम अउ श्रद्धा ले माता के जस गावत रहय।
भक्त के मन म एक दिन छत्तीसगढ़ के अलग-अलग देवी धाम के दर्शन करे के इच्छा जागिस। वो सोचिस कि हमर छत्तीसगढ़ के धरती म कतको शक्ति पीठ अउ माता के पावन स्थान हे। हर जगह माता अलग-अलग रूप म बिराजे हें। कोनो जगा महामाया के रूप म, कोनो जगा बम्लेश्वरी के रूप म, त कोनो जगा समलाई अउ काली के रूप म माता के पूजा होथे।
एक दिन भक्त ह अपन मन म माता के नाव लेके यात्रा करे के तैयारी करिस। वो अपन घर के मंदिर म दिया बारिस, नारियल चढ़ाइस अउ माता के चरण म माथा टेकिस। ओकर मन म खुशी घलो रहय अउ थोड़ा डर घलो रहय, काबर कि लंबा यात्रा म कईठन अनजान डगर पार करे बर रहय।
तब वो माता ले अरजी करिस – हे माता! मंय तोर दर्शन करे बर निकरत हंव। पाटनपुर, संबलपुर, धमतरी, डोंगरगढ़ अउ रतनपुर के पावन धाम म तोर महिमा सुनत आय हंव। मोर मन म सबो देवी मन के दर्शन करे के इच्छा हे। मोला अकेल्ला झन छोड़बे, मोर हर कदम म मोर संग देबे।
भक्त ह आगू राजिम के राजिम लोचन, भोरमदेव के महादेव अउ चम्पारण के पवित्र धाम के महिमा ला सुमिरिस। वो छत्तीसगढ़ महतारी ला प्रणाम करके अपन माटी के मान बढ़ाय के अरजी करिस।
यात्रा के कल्पना करत-करत भक्त के मन म अनेक देवी मंदिर के तस्वीर उभरत गिस। रायपुर के बंजारी माता, कोरबा के मड़वारानी, झलमला के गंगा माई, राजनांदगांव के पाताल भैरवी, शीतला महमाई, रायगढ़ के बूढ़ी माई, दुर्ग के चंडी माता अउ महासमुंद के खल्लारी माता के दर्शन करे के इच्छा ओकर मन म जागिस।
भक्त सोचिस कि जब एतका पावन धाम म जाना हे, त माता के आशीर्वाद बिना यात्रा कइसे पूरा होही। एखरे से वो बार-बार माता ले विनती करिस – मोला संग देबे माता।
आगू गीत म काली माता के शक्ति अउ बैगा परंपरा के चित्रण आथे। गांव के लोकविश्वास म बैगा मन देवी सेवा, पूजा-पाठ अउ पारंपरिक अनुष्ठान के माध्यम ले माता के आराधना करथें। भक्त ला विश्वास रहिथे कि सच्चा मन ले माता के सुमिरन करे ले मन म हिम्मत अउ भरोसा बढ़थे।
अंत म भक्त अपन मन के डर ला माता के चरण म रख देथे। वो समझथे कि जिनगी के डगर म कभू सुख, कभू दुख, कभू कठिनाई आथे, फेर माता के भक्ति मनखे ला हिम्मत देथे।
ये कथा के संदेश आय कि सच्चा श्रद्धा, विश्वास अउ भक्ति ले मनखे अपन जिनगी के हर कठिन डगर ला पार करे के हिम्मत जुटा सकथे। माता के संग मांगे के मतलब केवल यात्रा म संग मांगे नइ, बल्कि जिनगी के हर पल म माता के आशीर्वाद मांगे आय।
अक्सर पूछे जाथे
Q1. मोला संग देबे माता गीत के गायक कोन हें?
ये गीत ला मिथलेश्वरी सेन गाये हें।
Q2. मोला संग देबे माता गीत के संगीतकार कोन आय?
ये गीत के संगीत पंडित विवेक शर्मा देहे हें।
Q3. ये गीत कोन भाषा म गाये गे हे?
ये गीत छत्तीसगढ़ी बोली अउ भाषा म गाये गे हे।
Q4. ये गीत कोन शैली के आय?
ये एक छत्तीसगढ़ी जस गीत आय।
Q5. मोला संग देबे माता गीत के मुख्य भाव का आय?
ये गीत म भक्त माता रानी ले अपन संग अउ आशीर्वाद देहे के विनती करथे।
Q6. ये गीत म छत्तीसगढ़ के कोन-कोन धार्मिक स्थान के वर्णन हे?
गीत म डोंगरगढ़, रतनपुर, राजिम, भोरमदेव, चम्पारण, रायपुर, कोरबा, राजनांदगांव, रायगढ़ अउ अउ दूसर स्थान के वर्णन हे।
Q7. ये गीत के गीतकार कोन आय?
गीतकार के नाम के प्रमाणित जानकारी अभी उपलब्ध नइ हे।
Q8. ये गीत के संगीतकार कोन हें?
पंडित विवेक शर्मा।
Q9. ये गीत ला कहां पढ़े जा सकथे?
ये गीत के पूरा लिरिक्स cgjaslyrics.com म पढ़े जा सकथे।
Q10. ये गीत के मुख्य संदेश का आय?
माता ऊपर श्रद्धा रखे अउ जिनगी के हर डगर म माता के आशीर्वाद मांगे के संदेश ये गीत देथे।



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