तीन पतियां बेल के/कांतिकार्तिक यादव /रामा लहरें /जसजीत lyrics
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गीत-तीन पतियां बेल के
गायक -कांतिकार्तिक यादव
गीतकार - रामा लहरें
म्यूजिक कंपनी-ओपी देवांगन
वेबसाईट ऑनर -कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2
उड़ान - गंगा चढ़ावव तोला, दूध चढ़ावव तोला
फूल चढ़ावव मैं कनेर के
तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2
अंतरा - 1
शिव समाये अन्तस मा मोर शिव हे नीरा कारी l
कोन रूप मा पूजा करव तोर मैहा तोर पुजारी ll
उड़ान - सांस मा जपव मै तोला, तोर ध्यान लगावव भोला -2
साधव मैं तन मन ला सघेर के-2
तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2
अंतरा - 2
सांस हा तोर नाव जपत हे शंभू शंकर भोला l
ये जिंनगी ला करवे समर्पण पांच रतन के चोला ll
उड़ान - मानव जनम अमोल, तर जातिश ये मोर चोला-2
जिंनगी हो जाना हे राख ढेर के -2
तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2
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हे मैया माता सेवा मा चले आबे जसगीत
बइठे हावय बमलाई डोंगरगढ़ में जसगीत
आवो देवी दुर्गा देवेंद्र साहू जसगीत
धरम के बात राम दयाल जायसवाल जसगीत
इस गीत में भक्त भगवान शिव को बेलपत्र की तीन पत्तियों से पूजा करने की बात कहता है। वह गंगा जल, दूध और कनेर फूल अर्पित करके भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहता है।
भक्त कहता है कि शिव उसके हृदय में बसे हैं और वह हर सांस में उनका नाम जपता है। वह अपने तन-मन को साधकर पूरी श्रद्धा से महादेव की पूजा करता है।
गीत का दूसरा भाग जीवन की सच्चाई को बताता है कि यह मानव जीवन बहुत अमूल्य है और अंत में शरीर राख बन जाना है। इसलिए इस जीवन को भगवान शिव को समर्पित करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
यह शिव भक्ति पर आधारित शांत भाव का जसगीत है
बेलपत्र की तीन पत्तियों का आध्यात्मिक महत्व बताया गया है
सांस-सांस में शिव नाम जपने का संदेश
जीवन की नश्वरता का भाव
पूर्ण समर्पण और भक्ति का वर्णन
शिव पूजा की पारंपरिक विधि का उल्लेख
एक छोटे से गांव में शिवभक्त निहाली नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह रोज सुबह उठकर नदी से पानी लाता और जंगल से बेलपत्र तोड़कर भगवान शिव की पूजा करता।
निहाली का विश्वास था कि तीन पतियों वाले बेलपत्र में भगवान शिव का विशेष वास होता है। वह हमेशा तीन पत्तियों वाला बेल ढूंढकर ही लाता और बड़े प्रेम से शिवलिंग पर चढ़ाता।
एक दिन गांव में अकाल पड़ गया। खेत सूख गए, पानी खत्म होने लगा। लोग परेशान हो गए। लेकिन निहाली ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। वह रोज शिव मंदिर जाकर कहता —
"गंगा चढ़ावव तोला, दूध चढ़ावव तोला, फूल चढ़ावव मैं कनेर के…"
लोग उसका मजाक उड़ाते, लेकिन वह हर सांस में शिव का नाम जपता रहा।
कुछ दिन बाद एक रात निहाली को सपना आया। भगवान शिव प्रकट हुए और बोले —
"तोर भक्ति ले मैं प्रसन्न हवँव, कल पानी बरसही।"
सुबह होते ही आसमान में बादल छा गए। तेज बारिश शुरू हो गई। गांव के तालाब भर गए, खेत हरे हो गए।
तब गांव वाले समझ गए कि सच्ची भक्ति से भगवान जरूर प्रसन्न होते हैं। सभी ने मिलकर शिव मंदिर में पूजा की और निहाली को सम्मान दिया।
उस दिन से गांव में यह गीत गाया जाने लगा —
"तीन पतियां भेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के…"
यह गीत आज भी हमें सिखाता है कि जीवन नश्वर है, लेकिन भगवान शिव की भक्ति अमर है। सांस-सांस में शिव नाम जपने से मन शांत होता है और जीवन सफल बन जाता है।



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