सेवा ल तोर गाहू दर्शन ल करके जाहु – छत्तीसगढ़ी जस गीत
गीत -सेवा ल तोर गाहू
गायक -
गीतकार-
शैली -पचरा ,पारंपरिक
भाषा -छत्तीसगढ़ी
म्यूजिक कम्पनी -मोर बोड़ला
वेबसाइट - www.cgjaslyrics.com
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे
______๑♡๑______
मुखड़ा
सेवा ल तोर गाहू दर्शन ल करके जाहु
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
सेवा ल तोर गाहू दर्शन ल करके जाहु
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
अंतरा -1
तोर भुवन के तीन दरवाजा में बईठे हे अंजनी के लाला ओ
बईठे हे अंजनी के लाला
तोर भुवन के तीन दरवाजा में बईठे हे अंजनी के लाला ओ
बईठे हे अंजनी के लाला
यहो बईठे हे अंजनी के लाला हो मईया
बईठे हे अंजनी के लाला हो
बईठे हे अंजनी के लाला
देवो म राम बड़े हे वीर म हनुमान बड़े हे
देवो म राम बड़े हे वीर म हनुमान बड़े हे
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
सेवा ल तोर गाहू दर्शन ल करके जाहु
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
अंतरा -2
लकलक रूप दिखत हे धरे हे गदा कटारी
दाई धरे हे गदा कटारी
लकलक रूप दिखत हे धरे हे गदा कटारी
दाई धरे हे गदा कटारी
पापी ल मार डारे भगतन ल तैहा उबारे
पापी ल मार डारे भगतन ल तैहा उबारे
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
सेवा ल तोर गाहू दर्शन ल करके जाहु
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बरआये हव
अंतरा -3
नवदिन नवरात परब म बघवा के करे सवारी
दाई बघवा के करे सवारी
नवदिन नवरात परब म बघवा के करे सवारी
दाई बघवा के करे सवारी
पहुना बरोबर आये दर्शन ल हमन पायेन
पहुना बरोबर आये दर्शन ल हमन पायेन
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
सेवा ल तोर गाहू दर्शन ल करके जाहु
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
खुले हे दरवाजा ओ दाई दर्शन बर आये हव
═══════
गीत के अर्थ ( Meaning in Chhattisgarhi)
गीत के महत्व
-
ये गीत खासकर भक्ति भाव जागृत करथे।
-
दाई (माँ दुर्गा) के कृपा, आशीर्वाद ल पाय बर गाया जाथे।
-
ये गीत गावत समय गाँव-घर मा शांति अउ भक्ति के माहौल बन जाथे।
लोगन मन विश्वास करथें कि दाई के भक्ति ले सब्बो दुख-दर्द मिट जाहि अउ ये चोला तर जाहि ।
🎉 कब गाए जाथे (Occasion)
-
ये गीत नवरात्रि के समय ज्यादा गाए जाथे।
-
गाँव-गाँव मा नवरात्रि के समय जब देवी के स्थापना होथे में जसगीत मंडली बैठथे, त ये गीत जरूर गाए जाथे।
-
व्रत-पूजा, दाई के मेला, जागरण, अउ देवी के अवसर मं गाए जाथे।
🪔 क्यों खास हे ये गीत?
छत्तीसगढ़ मा जसगीत सिरिफ गाना नइ होवय, ये भक्ति अउ संस्कृति के पहचान हावय।
"सेवा ल तोर गाहू" गावत समय भक्त मन अपन मन के पीरा भुलाके, दाई मया मा खो जाथें।
आप मन अगर ये गीत सुनना चाहत हव निचे लिंक दे हव क्लिक करव
👇माता रानी के अउ जस गीत के लिंक निचे दे हावे जाके क्लीक करव 👇
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें