महू आयेव तोर दुआर /पूरन साहू /छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

महू आयेव तोर दुआर / पूरन साहू / छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स

Mahu aayev -imga

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मुखड़ा 

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी 

हो मां बमलेश्वरी हो मां बमलेश्वरी

उड़ान- लइका के हो मईया --हों ओ 

लईका के देबे तै दुलार ओ मां बमलेश्वरी

 ओ मां बमलेश्वरी ओ मां बमलेश्वरी 

ये वो ये मां बम्लेश्वरी ओ मां बम्लेश्वरी -2

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी 

अंतरा -1 

लख चौरासी भटक के मैहा पाऐव हीरा कस चोला

देख देख दुनिया के चरितर गुने ल भइगे मोला

उड़ान- होही कइसे  मईया --ओ हो ओ

होही कइसे ,होही कइसे, होही कइसे

जीव के उबार ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी 

अंतरा -2 

देख डरेव मोह माया के दुनिया बने बने मा भाथे

विपट परे मा कोन ला कहिबे अपने मुहू लुकाथे

उड़ान- सुआ रथ के मईया-- ओ हो ओ

सुआ रथ सुआ रथ सुआ रथ 

हे संसार ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी 

अंतरा -3 

नाचेव बेंद्रा नचेव दाई तोरे ध्यान धरे हो

कभू तो होहि तोर दर्शन हा तोर अइसे कहीके परे हव

उड़ान-चले आबे मईया ओ-- हो ओ

चले आबे चले आबे है चले आबे

सुन के गोहर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी 

अंतरा -4 

नई मागेव धन महल आठारी कोनो विपत के बंधन

तोर चरण के धुर्रा देदे माथ लगाहु चंदन

उड़ान-पुरन के मईया --ओ हो ओ

पुरन के पुरन के पुरन के 

प्राण आधार ओ मां बमलेश्वरी

ओ मां बमलेश्वरी ओ मां बमलेश्वरी 

एवो ओ मां बमलेश्वरी ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी  

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गीत -महुँ आयेव तोर दुआर 

गायक -पूरन साहू 

गीतकार -पूरन साहू 

म्यूजिक कंपनी -के के कैसेट्स 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com  

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी म)

ए गीत म गायक अपन मन के भक्ति ला माता बमलेश्वरी बर समर्पित करथे। गायक कहिथे कि वो हजारो जगह भटके बाद महतारी बमलेश्वरी के दुआर मा आइस। मोह-माया, दुख-तकलीफ अउ संकट ले घिरा जीव ला बस एके आसरा हावे – महतारी के दया अउ दर्शन।
गायक धन-दौलत नई मांगथे, वो सिरिफ अपन जिनगी बर माता के चरण धुर्रा अउ दर्शन के आशीर्वाद चाहथे। गीत म बेंद्रा नाच, भक्ति के उमंग अउ माता के प्रति गहरी आस्था के भावना झलकथे।


🌼 गीत के महत्व

  • धार्मिक महत्व – ए गीत बमलेश्वरी माता के भक्ति अउ श्रद्धा के प्रतीक हावे।

  • आध्यात्मिक महत्व – मोह-माया ले उबरके जीव ला मुक्ति के मार्ग दिखाथे।

  • सांस्कृतिक महत्व – छत्तीसगढ़ी समाज मा जस गीत भक्ति अउ उत्सव के गहिरा हिस्सा हवे।

  • भक्ति भाव – भक्त धन-संपत्ति नई मांगके सिरिफ महतारी के चरण मा अपन माथ टेकथे।


🎤 गायक परिचय

ए गीत के गायक पूरन साहू अपन मधुर आवाज म बमलेश्वरी माता के गाथा गाथे। वो छत्तीसगढ़ी लोक संगीत अउ जस गीत के संगीतमय परंपरा ला जिंदा रखे हवय। गायक के स्वर म भक्ति के गहराई, समर्पण अउ श्रद्धा के भाव सुनयइया ला भक्ति रस म डुबा देथे।पूरन साहू जी जस गीत अउ होली फ़ाग अउ साथ ही साथ गीतकार भी हरे। साहू जी अंजोरा राजनाँदगाँव के रहिया आय।  

महू आयेव तोर दुआर — माँ बमलेश्वरी कथा (छत्तीसगढ़ी म )

🚩 सुरुआत

भइया-बहिनी हो, सुनव आज मं तुमन ला माँ बमलेश्वरी के कथा सुनाथंव। ये कथा ह हमर छत्तीसगढ़ के भक्ति, मया, अउ भरोसा के गहिरा चिन्हा आय। जेन मन एक बेर घलो डोंगरगढ़ जाके माँ बमलेश्वरी के दरसन कर लेय, ओ मन अपन जिनगी भर बर एक अलगच ताकत ले भर जाथें।

गीत म जऊन बोली हावय —
महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी
ओही ह ए कहानी के असली आधार हावय।


🙏 गाँव अउ परिवार के कहानी

पुराना जमाना के बात आय। एक गॉंव म रामसाय नाम के आदमी रहिस, ओकर घरवारी कामिनी  अउ दू नान्हें लइका रहिन। खेती-बाड़ी ले उंकर गुजर-बसर चलत रहिस। सुरता ह जब्बो रहिस, गाँव के लोगन ह मया-परसाद म बंधे रहिन।

एक साल ख़ुबपानी आइस खेत बिगड़ गे। खेत डूब गे, अन्ना नई रहिस, घर म भूख लगत रहिस। रामसाय अउ ओकर घरवारी रोजे चिंतित रहिन। लइका मन भूख ले रोवत रहिन।

सोनी ह रोज रात म आसमान देखके गोहरावत रहिस —
“हे माँ बमलेश्वरी, तोर भक्ति म मोर भरोसा आय, अब तो हमर दुख ला दूर कर।”


🌼 सपना म दर्शन

एक रात रामसाय ला सपना आइस। सपना म एक सुन्दर देवी आईस। चमकदार चेहरा, माथे म फूल, हाथ म रामसाय, तोर दुख-दर्द मं सुन लेहंव। तोर घर-परिवार ला संभाले बर, तें मोर डोंगरगढ़ म आव, मं तोर संग हंव।”

सबेरे उठके रामसाय अपन घरवारी ला सब्बो बताइस। सोनी कहिस —
“तें सही सुनिस। अब चलव, माँ के दुआर म।”


🚶‍♂️ डोंगरगढ़ के यात्रा

रामसाय, कामिनी  अउ लइका मन सबेरे-सबेरे डोंगरगढ़ के यात्रा बर निकलिन। डोंगर म चढ़ना आसान नई रहिस। पर मन म मया अउ भरोसा रहिस। रास्ता भर लइका मन गीत गावत रहिन —
महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी…

गांव के लोगन घलो देखिन अउ कहिन — “देखव, माँ के भरोसा ह मनखे ला कइसे चलावत हे।”


🌺 माँ बमलेश्वरी के मन्दिर म

जेन दिन वो मन मन्दिर म पहुंचिन, ओकर मन म एकदम अलगच सुकून आइस। घण्टी बाजत रहिस, दीया जलत रहिस, भजन गूंजत रहिस। रामसाय अपन पूरा परिवार के संग माता के मूर्ति आगू माथा टेकिस अउ कहिस —

“हे माँ, धन-दौलत नई चाहंव, महल-आठारी नई चाहंव। बस मोर लइका मन ला भूख ले बचा लेव अउ मोर घर म सुख-शांति ला भर दे।”


🌟 चमत्कार के सुरुआत

एही ले धीरे-धीरे चमत्कार देखे ला मिलिस।

  • खेत म दुबारा उपज होय लगिस।

  • नजदीकी नदी म मछरी मिलय लगिस।

  • गाँव म बाजार चहल-पहल ले भर गे।

सब्बो कहिन — “ए सब्बो माँ बमलेश्वरी के किरपा आय।”


💃 त्योहार अउ भक्ति

एही बेरा ले गाँव म बड़ मेला लगय लगिस। जुड़वास के दिन त भारी मेला लगथे।औरत मन दीया-बत्ती जलाथें।बेंद्रा

 नाचथे।भजन-कीर्तन होथे।लोगन अपन परिवार संग म पूजा करथे।

गीत गूंजत रहिथे —

महू आयेव तोर दुआर ओ मां बमलेश्वरी।”

ए दिन पूरा डोंगरगढ़ भक्ति अउ आनंद ले भर जाथे।


🌿 सीख अउ संदेश

ए कथा ले का सिखे ल मिलथे?

  1. सच्चा भरोसा रखव – मन ले पूजा करबो, धन-दौलत नई मांगबो।

  2. माँ सिरिफ मया देखथें – ओला झन देखना परथे कि तुमन कति धनी हव, बस मन के सच्चाई देखथें।

  3. भक्ति म शक्ति हे – भक्ति ले मन के डर अउ चिंता दूर हो जाथे।

  4. समाज ला जोड़थे – त्यौहार अउ मेला ह लोगन ला एकता म बांधथे।


✨ आज के समय म महत्व

आज घलो हजारों-लाखों लोगन हर डोंगरगढ़ म माता बमलेश्वरी के दर्शन करथे। कोनो मन मनौती ले जाथे, कोनो भक्ति म, कोनो अपन परिवार के भलाई बर।
सब्बो कहिथें — “मां ह सदा संग रहिथे। जेन मन भरोसा करथे, ओ मन ला मया अउ शक्ति जरूर मिलथे।”माँ 

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माँ  बम्लेश्वरी आप सब की मनोकामना पूर्ण करें 

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