आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो | विजय कुमार सिंगरौल | छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत


आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत विजय कुमार सिंगरौल

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो

गीत परिचय

“आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” एक भक्ति भाव ले भरपूर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत आय। ए गीत म नवदुर्गा दाई के आगमन, भुवना म जोत जलाय के भक्ति, अंगना लिपाय के चौक पुराय के परंपरा अउ कलश, धान, आम के पाना ले पूजा-सजावट के सुंदर चित्रण करे गे हवय।

ए गीत ला विजय कुमार सिंगरौल गाये हवंय अउ गीत के रचना घलो विजय कुमार सिंगरौल के हवय।

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गीत -आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो 

गायक -विजय कुमार सिंगरौल 

गीतकार -विजय कुमार सिंगरौल

शैली -छत्तीसगढ़ी पचरा जस  

यूट्यूब -vijay gana channel 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो ,भुवना मा जोत जलाये हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

 आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो ,भुवना मा जोत जलाये हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

ये मोर मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

ये मोर मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

अंतरा -1 

कुटधर अंगना लिपायेव मोर माता वो ,मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

कुटधर अंगना लिपायेव मोर माता वो ,मोतियन चौक पुराये हो माँ 

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

 ये मोर मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

 ये मोर मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

अंतरा -2 

सोन के कलशा अउ सूपा भर धान वो आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

सोन के कलशा अउ सूपा भर धान वो आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ

 ये मोर मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

 ये मोर मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

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गीत के अरथ

ए गीत के मूल भाव नवदुर्गा दाई के स्वागत अउ भक्ति ऊपर आधारित हवय।

“आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” के भाव ये आय कि नवरात्रि के पावन बेरा आ गे हवय अउ भक्त अपन घर-आंगन म दाई के पूजा बर तैयारी करत हें।

“भुवना मा जोत जलाये हो माँ” म दाई के भक्ति म पवित्र जोत जलाय के भाव हवय। जोत ला श्रद्धा, आस्था अउ उजियारा के प्रतीक मान के पूजा करे जाथे।

“कुटधर अंगना लिपायेव” म घर-आंगन ला साफ-सुथरा करके पूजा बर तैयार करे के परंपरा देखे बर मिलथे।

“मोतियन चौक पुराये” म चौक बनाय के लोक परंपरा के उल्लेख हवय।

“सोन के कलशा अउ सूपा भर धान” म छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी अउ अन्न के महत्व झलकथे।

“आमा के पतरी सजाये” म आम के पाना ले पूजा के जगह सजाय के पारंपरिक भाव दिखाई देथे।


🌾 छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म नवरात्रि के बेरा देवी-देवता के पूजा के संग घर-आंगन के साफ-सफाई, चौक सजाय, कलश स्थापना अउ जोत जलाय के परंपरा देखे बर मिलथे।

धान छत्तीसगढ़ के प्रमुख अन्न आय, एखर से पूजा के तैयारी म धान के उपयोग के अपन अलग महत्व रहिथे। सूपा, कलश, आम के पाना, जोत अउ चौक जइसन चीज मन छत्तीसगढ़ी लोकजीवन अउ धार्मिक परंपरा के हिस्सा हवंय।

ए पचरा जस गीत एही लोकभावना ला सरल छत्तीसगढ़ी बोली म गीत के रूप देथे।

गीत के विशेषता अउ महत्व

  • गीत म नवदुर्गा दाई के भक्ति के भाव हवय।
  • छत्तीसगढ़ी लोकबोली के सहज उपयोग करे गे हवय।
  • पचरा जस गायन के पारंपरिक भाव दिखाई देथे।
  • जोत जलाय अउ देवी के स्वागत के सुंदर चित्रण हवय।
  • धान, सूपा, कलश अउ आम के पाना जइसन लोक वस्तु के उल्लेख हवय।
  • नवरात्रि के पूजा माहौल बर गीत उपयुक्त हवय।
  • गीत म घर-आंगन अउ देवी पूजा के छत्तीसगढ़ी संस्कृति झलकथे।

✍️ गीतकार के जानकारी — विजय कुमार सिंगरौल

विजय कुमार सिंगरौल ए गीत के गीतकार अउ गायक हवंय। “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” म उन्हीं के रचनात्मक भाव अउ गायकी के माध्यम ले नवदुर्गा दाई के भक्ति ला छत्तीसगढ़ी पचरा जस के रूप म प्रस्तुत करे गे हवय।

ए गीत म सरल लोकभाषा, देवी भक्ति अउ छत्तीसगढ़ी पूजा परंपरा के मेल देखे बर मिलथे।


🎤 गायक के जानकारी — विजय कुमार सिंगरौल

विजय कुमार सिंगरौल ए गीत के गायक हवंय। ए गीत म छत्तीसगढ़ी पचरा जस के भक्ति भाव ला अपन आवाज के माध्यम ले प्रस्तुत करे गे हवंय। गीत के बोल म मौजूद पूजा, जोत अउ नवदुर्गा के भाव ला गायकी के माध्यम ले श्रोता मन तक पहुंचाय के प्रयास करे गे हवय।


📖 गीत के कथा 

नवरात्रि के पावन बेरा म गांव के माहौल एकदम भक्तिमय हो जाथे। घर-घर म दाई के पूजा बर तैयारी शुरू हो जाथे। बिहान ले घर के अंगना साफ करे जाथे, आंगन ला लिप-पोत के सजाय जाथे अउ पूजा के जगह ला पवित्र बनाय जाथे। एही भक्ति के माहौल ला “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” गीत म सुंदर ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।

गीत के शुरुआत म भक्त अपन मन के भाव ले नवदुर्गा दाई ला अपन घर-भुवना म विराजे के निवता देथे। दाई के स्वागत बर भुवना म जोत जलाय जाथे। जोत के उजियारा म भक्त के मन म आस्था अउ भरोसा के भाव जागथे। दाई के पूजा म जलत जोत ला पवित्रता अउ भक्ति के चिन्ह के रूप म देखे जाथे।

दाई के आगमन बर घर के अंगना ला लिपाय-पोताय जाथे। छत्तीसगढ़ी गांव के पुरानी परंपरा म तिहार अउ पूजा के बेरा घर-दुवार के सफाई के विशेष महत्व रहिथे। साफ अंगना म चौक पुराय जाथे। चौक म रंग-बिरंगा आकृति बनाके दाई के स्वागत करे जाथे। गीत म मोतियन चौक के उल्लेख एही सुंदर परंपरा ला सामने लाथे।

आगे गीत म सोन के कलशा अउ सूपा भर धान के बात आथे। धान छत्तीसगढ़ के जीवन अउ किसानी संस्कृति ले गहराई ले जुड़ाय हवय। किसान बर धान खाली अन्न नइ, बल्कि परिवार के जीवन के आधार घलो आय। ए कारण पूजा के तैयारी म धान के उपयोग के अपन धार्मिक अउ सांस्कृतिक महत्व रहिथे।

आम के पाना ले पूजा के जगह सजाय के उल्लेख घलो गीत म मिलथे। आम के पाना, कलश अउ जोत जइसन चीज मन मिलके पूजा के पूरा वातावरण ला मंगलमय बनाथें।

ए गीत म भक्त के मन के एकेच भावना बार-बार उभर के आथे—मईया के स्वागत, पूजा अउ भक्ति। गीत के दोहरावदार पंक्ति जस गायन के विशेषता ला मजबूत करथे अउ सामूहिक रूप ले गावत बेरा श्रोता मन ला संग जोड़थे।

ए पचरा जस के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, देवी भक्ति अउ गांव के पारंपरिक पूजा-विधि के सुंदर संगम देखे बर मिलथे। गीत सुनत बेरा श्रोता मन ला नवरात्रि के वही भक्तिमय माहौल के अनुभव होथे, जिहां घर-आंगन म जोत जलथे, चौक सजथे अउ दाई के जयकारा गूंजथे।


❓ अक्सर पूछे जाथे

1. “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” गीत के गायक कोन हें?

ए गीत के गायक विजय कुमार सिंगरौल हवंय।

2. ए गीत के गीतकार कोन हें?

ए गीत के गीतकार घलो विजय कुमार सिंगरौल हवंय।

3. ए गीत कोन शैली के आय?

ए गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के आय।

4. ए गीत म काकर भक्ति करे गे हवय?

ए गीत म नवदुर्गा दाई के भक्ति अउ स्वागत के भाव हवय।

5. गीत म जोत जलाय के का भाव हवय?

जोत जलाय के भाव दाई के प्रति श्रद्धा, आस्था अउ भक्ति ले जुड़ाय हवय।

6. गीत म कऊन-कऊन पूजा सामग्री के उल्लेख हवय?

गीत म कलशा, धान, सूपा अउ आम के पतरी के उल्लेख हवय।

7. ए गीत ला कहां सुन सकथन?

ए गीत के यूट्यूब चैनल vijay gana channel म उपलब्ध हवय।

8. ए गीत म छत्तीसगढ़ी संस्कृति कइसे दिखथे?

अंगना लिपाय, चौक पुराय, धान, सूपा, कलश अउ आम के पाना जइसन परंपरागत चीज के उल्लेख ले छत्तीसगढ़ी संस्कृति झलकथे।


🔗 जस गीत 

  1. जगमग जगमग दीया बरत हे
  2. हे मैया माता सेवा मा चले आबे
  3. चंदन झूलना मां झूलना झूले मोर मईया
  4. पानी रे पानी रे पानी बरसे पानी
  5. तुम झुलव महामाई — पचरा जस गीत
  6. कंकालिन मोरे मया हो चंडालिन मोरे माया
  7. तोर आरती उतारन मोर दुर्गा मईया

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