टोनही झूपत हे आधा रात के - दुकालू यादव

Dukalu Yadav | Jas Geet | Tonhi Jhupathe Aadha Rat Ke | Chhattisgarhi Jas Geet | Navtari Bhajan 2025

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गीत -टोनही झूपत 

गायक -दुकालू यादव 

गीतकार -दुकालू यादव 

म्यूजिक कंपनी -के के कैसेट्स 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा  

सूत गेहे गांव भर गा --टोनही झूपत हे आधा रात के 

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

अंतरा -1 

सादा सादा लुगरा पहिरे चुंदी छरियाये गा चुंदी छरियाये

काला खावव काला बचावव कहिके गिगियाये गा कहिके गिगियाये

कहिके गिगियाये गा बईगा ,कहिके गिगियाये गा, कहिके गिगियाये गा

उड़ान - लागत हावय भारी डर गा -- कोन जनि हरय का जात के 

का जात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

अंतरा -2  

आधा आधा रात के टोनही जुगुर जुगुर बरथे गा जुगुर जुगुर बरथे 

अंधियारी ला चुने ओहर कोन जनि का करथे गा कोन जनि का करथे

जनि का करथे गा बईगा कोन जनि का करथे गा कोन जनि का करथे

उड़ान -बईगा तै उपाये कर गा -- तोला डर हावय का बात के 

 का बात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात के

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात


अंतरा -3   

जंतर मंतर मार के बईगा टोनही ला भगाये गा टोनही ला भगाये

जय होवय तोर चंदवा बईगा नाव हा जग मा छाये गा नाव हा जग मा छाये गा 

 नाव हा जग मा छाये गा बईगा नाव हा जग मा छाये 

उड़ान -सुमरे तोला कोसरिया हा  हर गा -- जस गा के अम्बे मात  के 

 अम्बे मात के चंदवा बईगा जस गा के अम्बे माँ के 

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

 सूत गेहे गांव भर गा --टोनही झूपत हे आधा रात के 

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात




गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi):

ए गीत मं आधा रात के वो डरावना माहौल ला बताय गे हवय, जिहां गांव मं टोनही (जादू-टोना करइया औरत) झूपत (घूमत) रहिथे। लोगन डरे रहिथें, काबर कि वो टोनही ककरो नुकसान कर सकथे।

गांव के चंदवा बईगा, जऊन समाज के जादू-टोना भगइया अउ भक्ति मं भरोसा रखइया हावय, वो अपन जंतर-मंतर ले टोनही ला भगाथे। आखिर मं सब अम्बे माता के सुमरन करथें अउ विश्वास जताथें कि भक्ति अउ माता के जस गाके, टोनही जइसने अंधविश्वास अउ डर सब मिट जाथे।


🌺 गीत के महत्व (Importance):

“टोनही झूपत” सिरिफ डर के कहानी नइ आय , ए गीत छत्तीसगढ़ी समाज के सोच, डर अउ आस्था के प्रतीक हावय। पुरखन मन के समय मं जब विज्ञान नइ रहिस, त बईगा अउ देवता मं विश्वास रहिस। ए गीत ओही समय के झलक देथे — जहां डर अउ भक्ति दुनो संग-संग चलत रहिन।

ए गीत बताथे के अंधकार (टोनही) मं भी उजियारा (भक्ति अउ माता अम्बे) के जीत होथे।

गीत के उद्देश्य (Purpose):

  1. लोकविश्वास के प्रस्तुति: टोनही अउ बईगा के पुरखौती परंपरा के दर्शन कराना।

  2. अंधविश्वास पर वार: डर के बजाय विश्वास अउ भक्ति मं भरोसा जगाना।

  3. संस्कृति के बचाव: छत्तीसगढ़ी लोककथा अउ जसगीत परंपरा ला जीवित रखना।

  4. मनोरंजन संग शिक्षा: गीत गावत समय समाजिक सन्देश देना — कि असली शक्ति भक्ति मं हे।


🌼 म्यूजिक कंपनी क्रेडिट:


 छत्तीसगढ़ी कहानी (Story Based on Song):

रात के आधा पहर बीत गे रहिस। गांव के ऊपर चांद झूलत रहिस, हवा ठंडी होगे रहिस, अउ लोगन अपन-अपन घर मं सोवत रहिन। फेर अचानक कुकुरमन भौंकना सुरु कर दिन।

गांव के बूढ़ा मन कहिन — “काबर भौंकथें? काबर हावा भारी होगे हे?”
किसे हावय नइ दिखे, फेर गली के कोने-कोने मं जइसे परछाईं हिलत रहय।

सूत गेहे गांव भर — टोनही झूपत हे आधा रात के।
कउवा पीपर के डारा मं कांव-कांव करत रहिस।

सादा लुगरा पहिरे, चुंदी छरियाय, वो औरत चुपचाप चालत रहय। कोनो ओकर चेहरा नइ देख पाइस। लोगन डरे रहिन — “का जात के गा टोनही हे?”

गांव के बीच रहिस चंदवा बईगा। ऊ बूढ़ा हावय, फेर ओकर माथा मं राख लगाय, गले मं तुलसी माला, अउ हाथ मं लोटा रहय।
लोगन कहिन —
“बईगा, टोनही झूपत हे गांव मं, कुछ उपाये कर।”

चंदवा बईगा आंख मूद लेथें, औ बोलथें —
“अंधियार मं डर नइ, विश्वास रखव।
जऊन अम्बे माता हमर रखवारी करथें, ओमन रइथें।
टोनही ला भगाय बर जंतर-मंतर नइ, सच्चा भक्ति चाही।”

बईगा अपन कोसरिया (कुशा के डंडी) ले जंतर-मंतर करे लगिस। ओकरा लगिस, हवा बदले लगिस, कुकुर शांत होगे, अउ चांद के उजियारा गांव के घर-घर मं भर गे।

लोगन सुमर लेथें —
“जय अम्बे माता!”

ओही बखत वो टोनही जइसने दिखे रहय छाया, धुंध मं गायब होगे।

दूसर दिन सवेर मं गांववाले बईगा के चरण छुइन।
कहिन —
“जय होवय तोर चंदवा बईगा, नाव तोर जग मं छाये गा।”

ए कहानी के सीख —
डर के आगे भक्ति अउ सत्य के उजियारा सबसे बड़ा हावय।
टोनही जइसने अंधविश्वास मं फसने के बजाय, अपन विश्वास अम्बे माता मं रखव।


🪔 निष्कर्ष (Conclusion):

“टोनही झूपत” दुकालू यादव के गाया गे एक सशक्त लोकगीत आय, जेमां समाज के पुरखौती डर, भक्ति अउ लोकविश्वास सब झलकथे।
ए गीत सुन के आजो गांव के बुजुर्ग कहिथें —
“जऊन टोनही ला भगाय सकथें, ओ बईगा नइ, ओ भक्ति हावय।”


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