मोर दुर्गा दाई के गांव - दुकालू यादव /छत्तीसगढ़ी जस lyrics

 मोर दुर्गा दाई के गांव - दुकालू यादव 

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गीत -मोर दुर्गा दाई के गांव 

गायक -दुकालू यादव 

गीतकार -प्रेम उस्ताद 

म्यूजिक कंपनी -kk casets 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

कउवा हा करत हे काव काव काव अउ पीपर के हे छाव 

 कउवा हा करत हे काव काव काव अउ पीपर के हे छाव 

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

अंतरा -1 

पीपर के रुखवा म बईठ के मईया के नाव रटत हे 

कोयली पड़की सुवा परेवना दुर्गा दुर्गा जपत हे 

Aww-चिरई मन करे चीव चाव ,चिरई मन करे चीव चाव 

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

अंतरा -2  

पंछी मन के पीपर बछेरा एक जगह सकलाये 

सूत उठ के बड़े फ़जर ले माता जी ला उठाये 

उड़ान -माता के परत हे पाँव ,माता के परत हे पाँव

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

अंतरा -3   

मन हर लेथे चिरई चिरगुन चीव चीव चीव जब चहके 

माता के अंगना माता के भुवना संझा बिहनिया दमके 

उड़ान -जब प्रेम के जस ल सुनाव  ,जब प्रेम के जस ल सुनाव

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

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गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi):

गीत “मोर दुर्गा दाई के गांव” ह एक भक्ति गीत आय जेमां गायक दुकालू यादव ह अपन गांव अऊ माता दुर्गा के भक्ति के संग जुड़ाव ला गाथे।
गीत मा “कउवा”, “कोयली”, “सुवा”, “परेवना” जइसने पक्षी मन के माध्यम ले माता दुर्गा के भक्ति अऊ प्रकृति के समरसता के सुंदर चित्रन करे गे हावय ।

पीपर के रुख तले जऊन भक्ति होथे, ओमा आत्मिक शांति अऊ प्रेम बसे हे। कोयल के मीठा गाना अऊ सुवा-परेवना के नाम जप सुनके लगथे जइसे पूरा गांव भक्ति के रंग म रंग गे होवय।
गीत मा ये बताय गे हे के माता दुर्गा के गांव म सबेरे-सबेरे पूजा, आरती अऊ भक्ति के माहौल रहिथे, जिहां हर मन शांत अऊ प्रसन्न रहिथे।

गीत के महत्व (Importance):

1.      भक्ति भावना के प्रतीक:
ये गीत मा माता दुर्गा के प्रती एक अगाध श्रद्धा अऊ विश्वास के भाव प्रकट होथे।

2.      प्रकृति अऊ देवी एक संग:
गीत मा प्रकृति अऊ देवी के एक अद्भुत संगम देखाय देथे। पीपर के रुख, चिरई मन, अऊ गांव के वातावरणसब भक्ति के रूप दिखथें।

3.      गांव संस्कृति के चित्र:
छत्तीसगढ़ी गांव के सादगी, प्रेम अऊ देवी भक्ति के सजीव रूप ये गीत मा मिलथे।

4.      लोकगीत के आत्मा:
दुकालू यादव के मधुर आवाज अऊ प्रेम उस्ताद के शब्द मन छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के आत्मा ला जगा देथें।


🎯 गीत के उद्देश्य (Udeshya):

1.      माता दुर्गा के भक्ति के संदेश ला गांव-गांव तक पहुँचाना।

2.      छत्तीसगढ़ के लोकभक्ति अऊ परंपरा के गौरव ला उजागर करना।

3.      नवपीढ़ी ला अपन संस्कृति अऊ देवी आस्था के प्रति प्रेरित करना।

 कहानी (Story in Chhattisgarhi):

मोर दुर्गा दाई के गांव” ह सिरिफ एक गीत नई, बल्के एक भावना, एक अपनापन के कथा आय।
छत्तीसगढ़ के छोटे गांव म बसे हे दुर्गा दाई के मन्दिर, जिहां हर भोर मा घंघरू के छनछन आवाज अऊ पक्षी मन के चहचहाहट सुनाय देथे।

भोर के बेला म पीपर के रुख तले एक बूढ़ा पुजारी अऊ गायक दुकालू यादव बईठ के माता दुर्गा के नाम रटथे — “दुर्गा दुर्गा…”
ओखर चारो ओर चिरई मन उड़े-फिरे करत, कोयली सुर ल धरके गावत रहिथे।

“कउवा हा करत हे काव काव काव, अउ पीपर के हे छांव…”
ये पंक्ति सुनके लागथे जइसे पूरा प्रकृति माता दुर्गा के भक्ति म मगन होगे हे।

गांव के मनखे मन बिहान लेच उठके माता के दर्शन बर जाथें।
बच्चा, बुढ़वा, माई-भौजी — सबके चेहरा मा भक्ति के उजास झलके।
फूल, नारियल, अगरबत्ती ले माता के पूजा होथे अऊ मन्दिर के आंगन म हर कोई अपन मन के मुराद कहिथे।

कोयली के मीठा गाना अऊ सुवा के कलरव मा एक अपनापन रहिथे।
ओखर हर आवाज लगथे जइसे माता दुर्गा अपन संताने के मन म बसे हे।

“पीपर के रुखवा म बईठ के मईया के नाव रटत हे, कोयली पड़की सुवा परेवना दुर्गा दुर्गा जपत हे…”
ये पंक्तियां ह ओ सुंदर भाव ला दिखाथे जिहां हर जीव-जंतु म भक्ति के लहर रहिथे।

गांव के लोगन मन कहिथें –
“माता दुर्गा के गांव म कभू दुख नई रहय, जो आथे ओखर मन खुश हो जाथे।”

हर साल दुर्गा पूजा के दिन इहां मेला लगथे।
गांव के लइका मन झूला झूलथें, औरत मन गीत गावत हें –
“मोर दुर्गा दाई के गांव…”
ए गीत सुनके लागथे जइसे पूरा गांव स्वर्ग बन गे होवय।

संजा बेला मा जब सूरज ढलथे, तब मन्दिर के दीप जले लागथे।
ओकर उजाला पीपर के पत्ता, चिरई के डार, अऊ माता के मूर्ति ऊपर परथे।
माता के आंगन म दमक रहिथे प्रेम अऊ भक्ति के उजियारा।

“माता के परत हे पांव, माता के परत हे पांव…”
ये पंक्ति ह ओ भाव ला दर्शाथे जिहां भक्त अपन जीवन म माता के आशीर्वाद ला धरना चाहथे।

गीत के हर शब्द म अपन गांव, अपन माटी, अऊ अपन देवी के प्रेम झलकथे।
प्रेम उस्ताद के लिखे ला दुकालू यादव ह अपन आवाज ले जियावथे, अऊ KK Casets के धुन ओला अमर कर देथे।

मोर दुर्गा दाई के गांव ह एक गीत नई –
ओ ह गांव के आत्मा,
ओ ह भक्ति के धड़कन,
अऊ ओ ह छत्तीसगढ़ के मया के मिसाल आय।


🌺 निष्कर्ष (Conclusion):

“मोर दुर्गा दाई के गांव” ह हर छत्तीसगढ़िया मनखे बर एक आस्था के प्रतीक आय।
ये गीत ह बताथे के भक्ति सिरिफ मंदिर म नई, बल्के हर पेड़-पौधा, हर चिरई, हर मन म बसथे।
जेकर मन मा सच्चा प्रेम अऊ मया रहिथे, ओला माता दुर्गा जरूर सुनथें।


📌 Website Credit:
Website Owner: के के पंचारे



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