ऐ हो मईया /गायक -पूरन साहू/www.cgjaslyrics.com

🚩🚩🚩ऐ हो मईया //पूरन  साहू //जस गीत लिरिक्स 🚩🚩🚩

Ye Ho Maiya -Jas-//Puran Sahu//kkPanchare Jas

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गीत -ऐ हो मईया 

गायक -पूरन साहू

गीतकार -पूरन साहू 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -केके पंचारे  

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मुखड़ा 

 ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये हो माँ -2 

उड़ान - तोरे दुवारी म आके नैनन के दीया जलाके -2

श्रद्धा के फुलवा चढ़ाईंन हो माँ 

 ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये हो माँ -2 

अंतरा -1 

सरग ले सूंदर लागे डोंगरी पहर तोर डेरा 

बारो महीना ओ लागे मेला कस ओ फेरा

 उड़ान- लाखों आवय ,लाख जावय-2

बिगड़ी तै सबके बनाऐ हो माँ 

 ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये

अंतरा -2 

पारव गोहारी तोर दुवारी तैहा दरस देखादे 

परख ले माई मोर पीरीत ल तैहा मया जगादे 

 उड़ान- जेनहा तोर अंगना आवय,बिन मागे ओ सब पावे-2

निर्खत नैना जुड़ाएं हो माँ 

 ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये

अंतरा -3

मोह माया के एक हर फांसा फसगेहव भवसगरी 

जिंगगी के डोंगा मोर बूड़त हे तोर बिना कोन तरही  

 उड़ान- नई मांगव धन डोगानी बस दर्शन दे महारानी -2

निर्खत नैना जुड़ाएं हो माँ 

 ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये

अंतरा -4

कलर कलर कलजुग के रेतिहा कर दे हे अधियारी 

तोर बिना मोर मन मंदिर म करही कौन उजियारी 

 उड़ान- पापे के नाश ल करदे दुखियाके दुःख हरदे-2

निर्खत नैना जुड़ाएं हो माँ 

 ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये

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गीत के अर्थ

हो मईयागीत मं भक्ति अऊ मया के गजब संगम देखे ला मिलथे। गीत मं गायक पूरन साहू अपन मन के सच्चा भावना ला माता के चरण मं रखथे।

हो मईया हो मईया तोर दरस बर आयेन, उबड़ धुर आसे लगायेन हो माँ
ऐ पंक्ति बताथे के भक्त माँ के दरबार मं दर्शन करे बर कतेक कठिनाई पार करके आथे। पहाड़ी, जंगल, कांटा-पत्थर ले गुजर के अपन मया अऊ भक्ति ला साबित करथे।

तोरे दुवारी आके नैना के दीया जलाके, श्रद्धा के फुलवा चढ़ाईन हो माँ
यहां  बताथे की  जब भक्त माँ के द्वार मं पहुँचथे, वो अपन आँख के दीया जलाथेयानी श्रद्धा के उजाला ले माँ ला प्रणाम करथे।

पहिली अंतरा मं कहे गे हे
सरग ले सुंदर लागे डोंगरी पहर तोर डेरा, बारो महीना लागे मेला कस फेरा
मतलब, माँ के डेरा डोंगरी ऊपर हवय, जिहां बारो महीना मेला कस लगथे। लाखों लोग आवत-जावत रहिथे, अऊबिगड़ी तैं सबके बनाय हो माँ” – माँ सबके बिगड़े काम ला बना देथें।

दूसरी अंतरा मं
पारव गोहारी तोर दुवारी तैहा दरस देखादे, परख ले माई मोर पीरीत तैहा मया जगादे
अइसे कहे गे हे के माँ अपन भक्त के प्रेम ला परखथे, अऊ जब सच्चा प्रेम दिखथे वो मया बरसाथे।
जेनहा तोर अंगना आवय, बिन मागे सब पावय” — जिहां माँ के द्वार मं जाथे, बिन मागे ही वो सब कुछ पाथे।

तीसरी अंतरा मं गायक अपन दुख-कष्ट ला बताथे
मोह माया के एक हर फांसा, फसगेहव भवसगरी, जिंगगी के डोंगा मोर बूड़त हे, तोर बिना कोन तरही
मतलब, जीवन नाव जइसे हे जे मोह-माया के सागर मं डूबत हे। माँ बिना वो पार नई लग सकय।
नई मांगव धन डोगानी, बस दर्शन दे महारानी” – भक्त धन-दौलत नई मांगत, बस माँ के दर्शन मांगत हे।

अंतिम अंतरा मं कहे गे हे
कलर कलर कलजुग के रेतिहा कर दे हे अधियारी, तोर बिना मोर मन मंदिर करही कौन उजियारी
कलियुग के अंधियारा मनखे के मन मं छा गे हे, अइस मं माँ ही उजियारा बनके आवथें।
पापे के नाश कर दे, दुखियाके दुख हर दे” – माँ पाप नाशक अऊ दुख हरने वाली हवं।

गीत के महत्व

v  हो मईयागीत छत्तीसगढ़ के जसगीत परंपरा के अमूल्य रचना हे।

v  ये भक्त अऊ देवी के मधुर संबंध ला बताथेमाँ अऊ बेटा के अपनत्व के बखान करथे।

v  गीत मं भक्ति, समर्पण, पीरा अऊ आशा के भाव मिले हे।

v  छत्तीसगढ़ी भाखा के मिठास अऊ लोकसंस्कृति के गहराई दिखथे।

v  गीत नवदुर्गा, नवरात्री अऊ देवी पूजा के बखत गावे ला बड़ उपयुक्त हे।

v  माँ के शक्ति मं विश्वास अऊ मन के पवित्रता के सिख देवत हे।


गीत के विशेषता

v  भाखाछत्तीसगढ़ी लोकभाखा मं रचे गे हे, जिहां हर पंक्ति मं अपनापन झलकथे।

v  भावना गीत मं भक्त के सच्चा मन के पीरा, ममता अऊ भरोसा हे।

v  रूपक – “नैना के दीया”, “भवसगरी”, “जिंगगी के डोंगाजइसने सुंदर रूपक मन उपयोग करे गे हे।

v  संगीतिक बानामुखड़ा-उड़ान-अंतरा के पारंपरिक जस-गीत बाना मं तैयार करे गे हे।

v  संदेशमाँ के बिना जीवन अधूरा हे, वो सबके दुख हरथें अऊ अंधियार मं उजियारा बनथें।


गीत के उद्देश्य

v  माँ दुर्गा अऊ जगदंबा के प्रति श्रद्धा अऊ विश्वास जगाना।

v  लोकभाषा मं भक्ति के माध्यम ले समाज मं सकारात्मकता फैलाना

v  छत्तीसगढ़ी संस्कृति अऊ गीत परंपरा ला बनाये रखना।

v  गरीब-दुखियारा मनखे मन मं भरोसा जगाना केमाँ तोर बिगड़ी ला बनाथे।

v  गीत ला सुनके हर मनखे मं भक्ति अऊ अपनापन के भावना उमड़े।

गायक परिचय 

ये गीत ल सुप्रसिद्ध जस भजन गायक पूरन साहू जी हा गाये हावय। साहू  हां  राजनांदगॉव जिला के ग्राम अंजोरा के रहिया आय। एकर गाना नवरात्रि पर्व के हर दुर्गा पंडाल म बजथे। एकर गायकी म देवी माँ प्रति गहरा मातृ समर्पित भावना झलकथे। साहू जी हा  गायन के साथ साथ अपन कलम लिखनी के जादू चलाय हावे।साहू के अनेको  जस झांकी छत्तीसगढ़  कोना कोना में चलत हे। 


निष्कर्ष

हो मईयागीत सिरिफ भक्ति गीत नई, बल्कि जीवन के सच्चाई ला दिखाथे।
माँ के दरस के तड़प, जीवन के दुख, मोह-माया ले मुक्ति, अऊ अंत मं शांतिसब कुछ गीत मं समा गे





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