ऐ हो मईया /गायक -पूरन साहू/www.cgjaslyrics.com
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गीत -ऐ हो मईया
गायक -पूरन साहू
गीतकार -पूरन साहू
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वेबसाइट ऑनर -केके पंचारे
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मुखड़ा
ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये हो माँ -2
उड़ान - तोरे दुवारी म आके नैनन के दीया जलाके -2
श्रद्धा के फुलवा चढ़ाईंन हो माँ
ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये हो माँ -2
अंतरा -1
सरग ले सूंदर लागे डोंगरी पहर तोर डेरा
बारो महीना ओ लागे मेला कस ओ फेरा
उड़ान- लाखों आवय ,लाख जावय-2
बिगड़ी तै सबके बनाऐ हो माँ
ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये
अंतरा -2
पारव गोहारी तोर दुवारी तैहा दरस देखादे
परख ले माई मोर पीरीत ल तैहा मया जगादे
उड़ान- जेनहा तोर अंगना आवय,बिन मागे ओ सब पावे-2
निर्खत नैना जुड़ाएं हो माँ
ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये
अंतरा -3
मोह माया के एक हर फांसा फसगेहव भवसगरी
जिंगगी के डोंगा मोर बूड़त हे तोर बिना कोन तरही
उड़ान- नई मांगव धन डोगानी बस दर्शन दे महारानी -2
निर्खत नैना जुड़ाएं हो माँ
ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये
अंतरा -4
कलर कलर कलजुग के रेतिहा कर दे हे अधियारी
तोर बिना मोर मन मंदिर म करही कौन उजियारी
उड़ान- पापे के नाश ल करदे दुखियाके दुःख हरदे-2
निर्खत नैना जुड़ाएं हो माँ
ऐ हो मईया हो मईया तोर दरश बर आयेन उबड़ धुर आसे लगाये
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गीत के अर्थ
“ऐ हो
मईया”
गीत
मं
भक्ति
अऊ
मया
के
गजब
संगम देखे
ला
मिलथे।
इ
गीत
मं
गायक
पूरन
साहू
अपन
मन
के
सच्चा
भावना
ला
माता
के
चरण
मं
रखथे।
गीत के महत्व
v
“ऐ हो
मईया”
गीत
छत्तीसगढ़ के
जसगीत परंपरा के
अमूल्य
रचना
हे।
v
ये
ह
भक्त अऊ देवी के मधुर संबंध ला
बताथे
– माँ
अऊ
बेटा
के
अपनत्व
के
बखान
करथे।
v
गीत
मं
भक्ति,
समर्पण,
पीरा
अऊ
आशा
के
भाव
मिले
हे।
v
छत्तीसगढ़ी भाखा
के
मिठास
अऊ
लोकसंस्कृति के
गहराई
दिखथे।
v
इ
गीत
नवदुर्गा, नवरात्री अऊ
देवी
पूजा
के
बखत
गावे
ला
बड़
उपयुक्त हे।
v
माँ
के
शक्ति
मं
विश्वास अऊ
मन
के
पवित्रता के
सिख
देवत
हे।
गीत के विशेषता
v
भाखा – छत्तीसगढ़ी लोकभाखा मं
रचे
गे
हे,
जिहां
हर
पंक्ति
मं
अपनापन
झलकथे।
v
भावना – इ
गीत
मं
भक्त
के
सच्चा
मन
के
पीरा,
ममता
अऊ
भरोसा
हे।
v
रूपक – “नैना
के
दीया”,
“भवसगरी”,
“जिंगगी
के
डोंगा”
जइसने
सुंदर
रूपक
मन
उपयोग
करे
गे
हे।
v
संगीतिक बाना – मुखड़ा-उड़ान-अंतरा के
पारंपरिक जस-गीत बाना मं
तैयार
करे
गे
हे।
v
संदेश – माँ
के
बिना
जीवन
अधूरा
हे,
वोह
सबके
दुख
हरथें
अऊ
अंधियार मं
उजियारा बनथें।
गीत के उद्देश्य
v
माँ
दुर्गा
अऊ
जगदंबा
के
प्रति
श्रद्धा अऊ
विश्वास जगाना।
v
लोकभाषा मं
भक्ति
के
माध्यम
ले
समाज
मं
सकारात्मकता फैलाना।
v
छत्तीसगढ़ी संस्कृति अऊ
गीत
परंपरा
ला
बनाये
रखना।
v
गरीब-दुखियारा मनखे मन मं
भरोसा
जगाना
के
“माँ
तोर
बिगड़ी
ला
बनाथे।”
v
इ
गीत
ला
सुनके
हर
मनखे
मं
भक्ति
अऊ
अपनापन
के
भावना
उमड़े।
गायक परिचय
ये गीत ल सुप्रसिद्ध जस भजन गायक पूरन साहू जी हा गाये हावय। साहू हां राजनांदगॉव जिला के ग्राम अंजोरा के रहिया आय। एकर गाना नवरात्रि पर्व के हर दुर्गा पंडाल म बजथे। एकर गायकी म देवी माँ प्रति गहरा मातृ समर्पित भावना झलकथे। साहू जी हा गायन के साथ साथ अपन कलम लिखनी के जादू चलाय हावे।साहू के अनेको जस झांकी छत्तीसगढ़ कोना कोना में चलत हे।
निष्कर्ष



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