चले आबे भवानी //पंडित विवेक शर्मा//पचरा जस गीत

🚩जय माता की 🚩चले आबे भावानी अंगना म मोर 🚩जय माता की 🚩
जुड़वास महोत्सव छातागढ़ (मोहलाई) । चले आबे भवानी अंगना मा मोर । स्वर - विवेक शर्मा । Cg Jag Geet 2024

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गीत-चले आबे भवानी 

गायक-पंडित विवेक शर्मा

गीत शैली-पचरा जस गीत

म्यूज़िक कंपनी -mor cg dharohar

Website owner -kk Panchare

Website - www.cgjaslyrics.com

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मुखड़ा 

सोला सिंगार करके लाली चुनरियाँ ओड़े-2 

चले आबे मोर दाई अंगना म मोर

चले आबे भवानी अंगना म मोर

सोला सिंगार करके लाली चुनरियाँ ओड़े-2 

चले आबे मोर दाई अंगना म मोर

चले आबे भवानी अंगना म मोर 

(अंतरा -1)

आवत अंगना बटोरे हो मईया मोर, गंगा जल छिड़काहव वो-2 

चन्दन पीठुलिया म बैठक देके, जमुना पाव पखारव वो-2 

चले आबे मोर दाई अंगना म मोर

चले आबे भवानी अंगना म मोर

(अंतरा -2)

कंचन धारी म नरियर धरके, सुंदर आरती उतरांव वो-2 

 पारा परोशीन सबला  बलाके, तोरे जस गावव वो-2 

चले आबे मोर दाई अंगना म मोर

चले आबे भवानी अंगना म मोर

(अंतरा -3) 

पंच अमरित के भोग लगावव, गइया के दूध पियावव वो-2 

 पलंग बिछवना बैठक देके, बीड़ा पान खवाव वो -2 

चले आबे मोर दाई अंगना म मोर

चले आबे भवानी अंगना म मोर

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अर्थ (arth )

ए गीत म घर-अंगना म दाई के आवे के बखान करे गे हे। सोला सिंगार म लाली चुनरिया ओढ़ के दाई के स्वागत करथे, गंगा जल छिड़कथें, चंदन पीठुलिया म बइठथे, पंचामृत के भोग लगाथें, सखिन मन मिल के जस गाथें, सिंगार अउ सेवा करथें। एला गाथे घर म शांति, मंगल अउ भक्ति बर मांगलिक भावना हे।

महत्व (Mahatv)

ए जस गीत छत्तीसगढ़ के नारी, मया अउ भक्ति संस्कृति के पहचान आय । नवरात्रि, जस-श्रृंगार अउ देवी पूजा म इहाँ गीत प्रमुख रूप म गाथे जाथे। ये गीत धार्मिक प्रसंग अउ सांस्कृतिक बंधन ला मजबूत करथे, संगवारी अउ परिवार म एकता अउ आनंद लाथे।

उद्देश्य (Udeshy)

ए गीत के उद्देश्य दाई के स्वागत, सेवा अउ श्रद्धा दर्शाना, छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति ला बचाय रखना अउ नवा पीढ़ी म भक्ति भाव जगाना ए। जस गीत माध्यम ले भक्ति, प्रेम अउ सामाजिक एकता के संदेश फइलाय जाथे।

कहानी - "दाई के आगमन" 

एक गांव म सुमित्रानाव के डोकरी दाई घर रहिस। ओ हर अपन अंगना ल रोज साफ-सुथरा राखथीस, फूल-पान अउ दीप ल सजा रखथीस। ओकर विश्वास रहिस – “जब दाई आय, त अंगना में उजियारी भर जाथे ।”नवरात्री के दिन आवत रहिस। गांव म गायक हा गाना गावत रिहिस  – “सोला सिंगार करके लाली चुनरिया ओड़े, चले आबे मोर दाई अंगना म मोर।”सुमित्रा हर अपन सखिन संग घर सजावत लगिस। गंगा जल ले अंगना ल छिड़कथिन, चौकी म चंदन घिसके पीठुलिया बनाइन। फेर कंचन धारी म नारियल धरिन, आरती के थार म दीया-बाती सजाइन।रात के बेला, हवा म गंध लहरावत रहिस। सुमित्रा हर जोन दीया जलाए रहिस, ओतके दीया अपन आपे म टिमटिमाय लागिस। तब सब झिन कहिन – “अरे, देखव! दाई आ गइन!”गांव भर मा भक्ति अउ खुसियारी बरसत रहिस। सुमित्रा हर अंजोरी हाथ ले दाई के आरती उतारिस – “चले आबे भवानी अंगना म मोर।”भक्त अउ सखिन मन मिलके जस गावइन, पंचामृत ले भोग लगाइन, दूध म मिठास मिलावत रहिन। दाई के चरण म झुकके सब गाना गाइन  – “मइया, हमर घर अंगना म सदा अइसने शुभता बनाय रख।"




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